केवल मानव ही क्यों इन सूक्ष्म जीवियों के गुस्से का शिकार होता है?

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प्रधानमंत्री का भाषण खत्म हो गया है प्रधानमंत्री ने लॉक डाउन का समय 21 दिन और बढ़ा दिया है। बड़ा अजीब समय चल रहा है मानव दड़बेनुमा घरों में दुबका हुआ हैं और पशु, पक्षी आज़ाद स्वछंद अठखेलियाँ कर रहे है। रह रहकर सवाल दिमाग में आ रहा है कि  केवल मानव ही क्यों इन सूक्ष्म जीवियों के गुस्से का शिकार होता है? मानव ने कितना परेशान किया और निरीह प्राणी कुछ नहीं बोल पाया, लेकिन शायद उसका आक्रोश जन्म लेता है, छोटे से सूक्ष्मजीवी के रूप में! मानव ने अपने अलावा किसी भी प्राणी को नहीं छोड़ा, सभी के साथ दुर्व्यहार किया।
आज लगभग हर घर के भोजन की थाली में किसी न किसी जीवजंतु की लाश होती है! आज एक तरफ मनुष्य खड़ा है और दूसरी तरफ सारे ही प्राणी। मानो संग्राम छिड़ गया हो! मनुष्य के पास न जाने कितने हथियार हैं लेकिन सूक्ष्मजीवियों के पास केवल स्वयं की ताकत है। आजकल सुबह होते ही मुंडेर पर बैठीं चिड़ियायों की चहचहाहट से ही नींद खुलती है। कभी कोयल की भी आवाज़ सुनाई पड़ती है लेकिन मनुष्य खामोश बैठा घर में कैद है। केवल बेचारा मोबाइल ही उसका सहारा है और वही उसका सबसे बड़ा दोस्त भी।
– केपी मलिक के एफबी साभार

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