पुस्तक मेले में दिखा भाषाओं का संगम और नयी किताबों का भण्डार

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स्टालों पर प्रशंसकों से मिले लेखक, मंच पर विचार, योगासन और विविध प्रस्तुतियां

लखनऊ, 30 सितम्बर। उन्नीसवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला अब समापन की ओर बढ़ चला है। मेले का आज सातवां दिन था। यह मेला दो अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रातः 11 से रात नौ बजे तक चलेगा।

मेले में सामान्य रूप से 10 प्रतिशत छूट मिल रही है परन्तु कई स्टालों पर 30 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। मेले में पुस्तक प्रेमियों का लेखकों से भी मिलना हो रहा है। बुकलैण्ड के स्टाल पर साम्राज्य पुस्तक के लेखक आशुतोष सिंह और प्रकाशक पुस्तक प्रेमियों के बीच थे। वितरक गौरव बताते हैं कि आज के युवाओं के बीच नये लेखकों की मांग की जा रही है। युवाओं में अब चेतन भगत सरीखे लेखकों की मांग उतनी नहीं रह गयी है।

मेले में प्रकाशन विभाग के स्टाल पर आजादी के 75वें वर्ष पर प्रकाशित अनटोल्ड स्टोरी आफ फ्रीडम स्ट्रगल, इण्डियन आर्म्ड फोर्स इन वर्ल्डवार-वन, भारत के प्रथम वैश्विक गायक मुकेश, पर्यावरण और विकास, मीराबाई आज के समय में जैसी कई नई पुस्तकें है। यहां राष्ट्रनायकों, लोकगाथाओं और देश पर अनेक दृष्टिकोणों से लिखी प्रामाणिक और तथ्यपरक पुस्तकें हैं। प्रदेश की उर्दू अकादमी के स्टाल पर मिर्जा जाफर की लखनऊ का दस्तरख्वान के अलावा मुताला ए इकबाल, आबे हयात, पंजाब में उर्दू आदि नयी किताबें हैं। राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के स्टाल पर उर्दू सबके लिए, उर्दू कैसे लिखें, उर्दू फार आल व तलफ्फुज जैसी लगातार बिकने वाली किताबें हैं तो डा.शेख अकील अहमद की इलेक्ट्रानिक सोशल मीडिया, एराक रजा की रिसाला हकनुमा, फैजुल्लाह खान की हिन्दुस्तान के माजूर… जैसी अनेक नयी पुस्तकें हैं। प्रदेश के संस्कृत संस्थान के स्टाल पर डा.तारादत्त की कैलासमानसरोवराभिगनम्, शतपथ ब्राह्मण का तीसरा खण्ड, श्रीमद्भागवत का चौथा खण्ड जैसी इसी साल छापी गयी पुस्तकें हैं तो यहां बाल संस्कृत पत्रिका के अंक भी लोग पसंद करने के साथ खरीद रहे हैं। हिन्दी संस्थान की लोकप्रिय पुस्तकों में घाघ भड्डरी की कहावतें, हिन्दी-उर्दू शब्दकोष बिक रही हैं तो भारत की प्रमुख भाषाएं-समकालीन प्रवृत्तियां और मानवतावाद और मध्यकालीन हिन्दी भक्ति साहित्य के अलावा कई और पुस्तकें इसी साल प्रकाशित की हैं।

साहित्यिक गतिविधियों की शरुआता आज मंच पर हिन्दुस्तानी साहित्य सभा की गोष्ठी से हुई। इसके बाद मधु चतुर्वेदी के संयोजन और संचालन में कादम्बिनी क्लब के कथासंग्रह का विमोचन हुआ और साहित्यिक चर्चा चली। क्लब की सदस्याओं ने रचनाओं का पाठ भी किया। आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से यहां स्वराज्य के सर्वप्रथम उद्घोषक महर्षि दयानन्द सरस्वती विषय पर विद्धानों ने वर्तमान संदर्भों को जोड़ते हुए वक्तव्य प्रस्तुत किये। आयोजक का विशेष आकर्षण दयानन्द बाल सदन मोतीनगर के बच्चों द्वारा योगासनों का प्रदर्शन रहा। इसके बाद यहां कविताओं की गूंज उठी।

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