नई दिल्ली : सूर्य करीब 8.28 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है; पृथ्वी की गति को केवल सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने तक सीमित समझना अधूरी तस्वीर है।
हम अक्सर पढ़ते हैं कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और सूर्य स्थिर है। लेकिन वास्तव में सूर्य भी स्थिर नहीं है। वह अपने ग्रहों के साथ मिलकर आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। यानी पृथ्वी एक साथ दो गतियों में शामिल है – सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में घूमना और सूर्य के साथ आकाशगंगा में आगे बढ़ना।
क्या यह सही है : 8.28 लाख की रफ्तार सही, लेकिन ‘कॉर्कस्क्रू’ वाली तस्वीर को समझना जरूरी
NASA के अनुसार सौरमंडल आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा लगभग 8.28 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से करता है। इस एक चक्कर को पूरा करने में करीब 23 करोड़ वर्ष लगते हैं। इसलिए इनपुट में दी गई गति और सूर्य के साथ ग्रहों के आगे बढ़ने की बात सही है।
हालांकि, पृथ्वी की यात्रा को हर समय एक सीधी और एक जैसी कॉर्कस्क्रू आकृति में दिखाना पूरी तरह सटीक नहीं है। यह दृश्य संदर्भ-तंत्र और कक्षा के झुकाव पर निर्भर करता है। PBS के वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक, ऐसी हेलिक्स वाली तस्वीर एक खास दृष्टिकोण से उपयोगी है, लेकिन इसे पृथ्वी की गति की पूरी और अंतिम तस्वीर मानना भ्रामक हो सकता है।
https://x.com/Astro_horizon00/status/2117374792160718879/video/1
यानी असली रोमांच यह है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा भी कर रही है और सूर्य के साथ आकाशगंगा में भी गतिमान है। अंतरिक्ष में हमारी यात्रा लगातार जारी है -बस उसका रास्ता किसी एक आसान चित्र से नहीं समझा जा सकता।






