लखनऊ, 16 मार्च। आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर तथा एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला द्वारा 11 जुलाई 2015 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में दर्ज कराये गए बलात्कार के मुकदमे में स्पेशल कोर्ट, एससी एसटी एक्ट, लखनऊ के पुलिस द्वारा प्रेषित अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। साथ ही फर्जी मुकदमा लिखवाने के अपराध में उस महिला के खिलाफ मुक़दमा चलाने के भी आदेश दिए हैं।
स्पेशल जज पद्माकर मणि त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा कि विवेचक ने कोर्ट को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विवेचना से वादिनी के बयानों में विरोधाभाष, उपनिरीक्षक राम राज कुशवाहा की जाँच, तथा मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोप फर्जी पाए गए।
कोर्ट ने कहा कि इस सम्बन्ध में वादिनी ने अपना प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर अमिताभ के वरिष्ठ आईपीएस होने के कारण उनके प्रभाव में सही विवेचना नहीं होने की बात कही थी।
कोर्ट ने कहा कि वादिनी द्वारा 161 तथा 164 सीआरपीसी तथा महिला आयोग को दिए गए बयान में भारी विरोधाभाष, उनके कथनों की असत्यता, सीडीआर में मोबाइल फोन की लोकेशन आदि के आधार पर अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह संभव नहीं है कि कोई महिला अपने घर में किसी अन्य महिला को बुला कर अपने पति से रेप करवाए।
इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने वादिनी को फर्जी मुक़दमा लिखवाने के आरोप में 182 आईपीसी में नोटिस भेजी।
11 जुलाई 2015 को मुलायम सिंह द्वारा अमिताभ को फोन से धमकी देने की शिकायत देने वाली रात को यह मुक़दमा दर्ज हुआ था, जिसमे विवेचक ने 20 मार्च 2017 को अंतिम रिपोर्ट दी थी।







