राष्ट्रीय बाल आयोग ने ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी की शिकायत को लिया संज्ञान में
लखनऊ, 11 अप्रैल। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार बलात्कार पीड़िताओं का बलात्कार हुआ है की नही इस बात की पुष्टि के लिए टू फिंगर टेस्ट नही किया जायेगा लेकिन उसके बाद भी उत्तर प्रदेश में बलात्कार पीड़िताओं का हो रहें टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने के लिए ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी 21 मार्च 2018 को राष्ट्रीय बाल आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग को ईमेल से भेजकर तत्काल हस्तक्षेप कर बलात्कार पीड़िताओं के गरिमा सम्मान और सुरक्षा का ध्यान देते हुए जांच के नाम पर टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। जिस पर राष्ट्रीय बाल आयोग संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है और 15 दिनों में किये गयें और सम्पूर्ण कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है।
गौरतलब है कि ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी की टीम ने लखनऊ में टू फिंगर टेस्ट हो रहा है या नही इस बात का पता करने के लिए 10 नाबालिग बलात्कार पीड़िताओं से उनकी मेडिकल जांच की प्रक्रियाओं के बारे मे बलात्कार पीड़िताओं से बातचीत किया जिसमें बलात्कार पीड़िताओ नेे बताया कि उनका बलात्कार हुआ कि नही ये जांचने के लिए डाक्टर टू फिंगर टेस्ट करतें है।
बलात्कार पीड़िता ने ये बताया कि मेडिकल जांच दो उगली से करने के दौरान उन्हें तकलीफ होती है जिसका वह विरोध किया लेकिन बलात्कार की जांच करने वाली डा. ने उनका हाथ दूसरे से पकड़वा दिया फिर जबरजस्ती दो उगली टेस्ट किया।
बलात्कार पीड़िता ने ये भी बताया की मेडिकल जांच करने से पहले डाक्टर पीड़िता की नाही सहमति लेते है और न ही उनके पास उनके परिवार के लोग रहते है।
ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी नें लखनऊ के लोकबन्धु हास्पिटल में तैनात महिला डाक्टर से बात किया तो उन्होंने बताया कि वह बलात्कार पीड़िताओं का बलात्कार हुआ है कि नही यह जांच करनें के लिए वह टू फिंगर टेस्ट करती है। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में टू फिंगर टेस्ट का उल्लेख नही करती।







