नई दिल्ली, 20 जुलाई 2018: मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार को अपदस्थ करने की रणनीति कितनी कारगर होगी यह तो समय ही बताएगा यहां तो स्थिति यह है कि ‘तू डाल डाल मैं पात -पात’। भाजपा के थिंक टैंकर्स ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ रणनीति तैयार कर ली है जो सरकार को सेफ जोन में रखेगी।
बता दे कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की तरफ से नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव की इजाजत देने के फैसले ने कई लोगों को हैरानी में डाल दिया है। एक तरफ जहां अधिकतर नेता यह मानकर चल रहे थे कि बजट सेशन की तरह ही दोबारा केंद्र सरकार विश्वास मत की इजाजत नहीं देगी, और उसके बाद सदन में कोई भी काम नहीं हो पाएगा। लेकिन सरकार के रणनीतिकारों ने कुछ और ही रणनीति अपनाई थी।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव की चुनौती को स्वीकार कर विपक्षियों का हैरान कर देना चाहते थे। एक मंत्री ने बताया वह हमेशा मानते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के आने के बाद विपक्षी दलों के पास सदन को नहीं चलने देने का कोई मुद्दा नहीं रह जाएगा। उनके अनुसार हम चाहते थे कि अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए ताकि मानसून सेशन के बाकी दिनों में महत्वपूर्ण बिलो को पास करवाया जा सके।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एनडीए से अलग होने वाली पीडीपी के सांसद के श्रीनिवासन के अविश्वास प्रस्ताव को नोटिस को स्वीकार किया। इस पुस्तकों में यह कहा गया है कि मंत्रिपरिषद में सदन अविश्वास जाहिर करता है कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि उनकी पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की इजाजत दी जाए, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने सांसद के श्रीनिवासन के अविश्वास प्रस्ताव पहले पेश करने वाले नियमों का हवाला देते हुए उन्हें इनकार कर दिया और कहा कि इस केस में पहले टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा है।







