नवेद शिकोह
राजनीतिक प्रचार का हथियार बनी फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों सियासी खेमों में बंट गई है। फिल्म ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ जहां भाजपा के लिए मुफीद साबित होने के इरादे से बनी है वहीं आगामी फिल्म ‘ठाकरे’ शिवसेना को लोकसभा चुनाव में ताकत दे सकती है।हर एक्सीडेंटल मामले में दोनो पक्षों को चोट लगना लाजमी है। चुनावी बेला में कांग्रेस पार्टी की किरकिरी करने वाली विवादित फिल्म ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ‘ के जवाब में कांग्रेस भी भाजपा पर वार करने वाली फिल्म का झटपट निर्माण कर सकती है। चर्चाएं हैं कि कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला और कांग्रेस के मुंबई इकाई के प्रमुख संजय निरूपम लोकसभा चुनाव से पूर्व कम समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों पर वार करने वाली एक फिल्म का निर्माण करने की तैयारी कर रहे हैं।

तमाम निर्माता – निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर और बड़े कलाकार कांग्रेस के संपर्क में ऐसी फिल्म के प्लाट पर मंथन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन खबरों के साथ कांग्रेसी समर्थक इस संभावित फिल्म का नाम सुझा रहे हैं। तमाम नामों में ‘जुमलेबाज’ नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। फिल्म एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पर पलटवार करने वाले जो अन्य नाम सुझाय जा रहे हैं उनमें शामिल हैं- कार्पोरेट सरकार, नोटबंदी, तानाशाह, साहब, राफेल डील, मुश्किल दिन, झूठ का सौदागर, चौकीदार कौन है !, भीड़तंत्र, बुलंदशहर, माॅब लिचिंग का जन्म, झूठा नंबर वन, धोखेबाज चौकीदार.. इत्यादि।
हेट स्पीच के इस दौर में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए राजनीतिक दलों ने सिनेमा के कंधे पर सियासत की बंदूक चलाने का जो सिलसिला शुरू किया है वो अभी थमने वाला नहीं। ये तमाम फिल्में ना सिर्फ सेंसर बोर्ड को एक बड़ी कशमकश में डाल सकती हैं बल्कि बालीवुड का राजनीतिकरण कर कलाकारों को दो खेमों में बंटने का सिलसिला तेज हो सकता है।
लगभग दो महीने बाद लोकसभा चुनाव प्रचार शुरू हो जाना है। राजनीतिक दल गठबंधन और टिकट बंटवारे के अलावा प्रचार की रणनीति पर काम कर रहे हैं। लगभग सभी दलों में तमाम फिल्मी हस्तियां शामिल हैं। बताया जाता है कि अपनी-अपने दलों में इन फिल्मी हस्तियों ने चुनाव प्रचार के इरादे से फिल्म निर्माण के प्रस्ताव रखे थे। साथ ही फिल्म इंडस्ट्री में पार्टियों के पक्ष और विरोध में खूब जमकर लाॅबीबाज़ी हुई। पार्टी से जुड़े कलाकारों ने अन्य कलाकारों को अपनी अपनी पार्टी में शामिल करने और उसके फेवर में बयान दिलवाने की भरपूर कोशिश की। इस वक्त भाजपा में बालीवुड के कलाकारों की भरमार है इसलिए कांग्रेस के खिलाफ और भाजपा के पक्ष एक फिल्म बनकर तैयार हो गयी।
इसके ट्रेलर पर ही कांग्रेसियों का हल्ला शुरू हुआ ही था कि भाजपाइने ये कहते हुए कांगेसियों का मुंह बंद कर दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी का दम भरने वाले ही फिल्म प्रदर्शन को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान ने विरोध करने वाले अपनों को खामोश कर दिया। किंतु अब कांग्रेस अभिव्यक्ति की आजादी का जवाब अभिव्यक्ति की आजादी से ही देगी। जिसके लिए भाजपा की किरकिरी करने वाली फिल्म को झटपट तैयार करने की कोशिश हो रही है।
आम चुनाव से पहले अपने-अपने कार्यकर्ताओं में जोश पैदा करने और अपने हक में माहौल बनाने के लिए रूपहले पर्दे पर सियासी दंगल होना अब तय है।
चुनाव प्रचार का ये माध्यम सबसे प्रभावशाली और सेफ भी है। चुनाव आयोग की बंदिशों में चुनावी खर्च पर सबसे कड़ी निगरानी होती है। ऐसे में पार्टी से अलग हट कर राजनीतिक फिल्मों से साफ भी मर जायेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। इन फिल्मों का प्रदर्शन चुनावी प्रचार जैसा काम करेगा।
पी आर एजेंसियों और एडवर्टाइजिंग उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आज राजनीति पार्टियों का मुख्य उद्देश्य खुद की तारीफ से ज्यादा प्रतिद्वंद्वी को बदनाम करना होता है। यही कारण है कि प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल की पोल खोलने वाली फिल्मों की छोटी विज्ञापन फिल्मों का काम आ रहा है।
जहां तक फीचर फिल्मों का सवाल है तो ऐसी फिल्मों पर विवाद हो जाये तो सोने पे सुहागा हो जाता है। पर्दे पर फिल्म से भी कहीं ज्यादा इसकी चर्चाएं अपना असर छोड़ती हैं। ऐसी फिल्मों के समर्थन और विरोध के बीच मीडिया और सोशल मीडिया में इसके वीडियो वायरल होते हैं। हर दल अपने पक्ष या दूसरे के विरोध में माहौल खड़ा करने में एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश करता है।
लोकसभा चुनाव की बेला पर ऐसी ही फिल्म की शुरुआत भाजपा समर्थक अनुपम खेर की फिल्म ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ से हो चुकी है। इससे भी पहले भाजपा समर्थक और यूपी के शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने अयोध्या विवाद को गरमाने वाली एक विवादित फिल्म अयोध्या का निर्माण किया था।
अब देखते है कांग्रेस समर्थित ‘जुमलेबाज’ जैसी कोई इतने जल्दी बन पाती है या नहीं !







