संविधान निर्माताओं ने संसद व विधानसभाओं में हंगामों की कल्पना नहीं की होगी। वह चाहते थे कि यहां मुद्दों पर व्यापक विचार विमर्श हो, उसके बाद बहुमत से निर्णय लिया जाए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सदन के भीतर हंगामा बढा है, सदन स्थगित करने की बार बार नौबत आती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसदीय संघ सम्मेलन में इस ओर इशारा किया। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को विधायी कार्यो का व्यापक अनुभव है, वह भी सदन के बेल में आकर हंगामा या नारेबाजी करने को अनुचित मानते है।
उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसदीय संघ ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारतीय लोकतंत्र की भावना राष्ट्रमंडल की भावना के अनुरूप है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र को कायम रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए हम सबको अपनी भूमिका का निर्वाह करना है। एकता और अखंडता को कायम रखना है।
इस सम्मेलन से ठोस निष्कर्ष निकलेंगे जिनसे लोकतंत्र और मजबूत होगा। सरकार तभी काम कर सकती है जब सदन बाधित न हो इससे जनता की भावनाएं भी आहत होती हैं। सरकार अपनी नीतियों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ देना चाहती है।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री






