- गांव से पलायन कर चुके लोगों के जमीन पर पौधरोपण की योजना बनाएगा वन विभाग
- वनमंत्री ने अधिकारियों को किया निर्देशित, कहा, लोगों को बटाई की अपेक्षा होगा ज्यादा फायदा
उपेंद्र नाथ राय
गांव से पलायन कर शहर में बस चुके लोगों को आने वाले दिनों में अपना खेत दूसरों को बटाई देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि वन विभाग की योजना फलीभूत हो गयी तो उनके खेत में हरे पेड़ पर्यावरण को संतुलित करने के साथ ही उनके आमदनी का जरिया भी बनेंगे। प्रति वर्ष पौधरोपण का बढ़ता लक्ष्य और विभाग के पास कम होती जमीन की भरपाई करने के लिए वन विभाग आने वाले दिनों में इस पर विचार करने जा रहा है। ये बातें गुरुवार को वनमंत्री दारा सिंह चौहान ने कही। वे एक कार्यक्रम के दौरान वन अधिकारियों से इस पर कार्य योजना बनाने के लिए विचार को निर्देशित भी किया।
इस वर्ष वन विभाग ने रिकार्ड 22 करोड़ से अधिक पौध रोपण किया है। यह अब तक का सर्वाधिक पौधरोपण है। इससे उत्साहित मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष का लक्ष्य 25 करोड़ दे दिया है। अब वन विभाग को पहले तो नर्सरी लगाने के लिए ही कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कई विभागों से तालमेल बनाने के बाद यह पूरा हुआ। अब पौधरोपण के लिए जमीन की भी कमी आड़े हाथ आ सकती है। इसके लिए कई तरह की योजनाओं पर वन विभाग चर्चा कर रहा है।

उन्हीं चर्चाओं के बीच वनमंत्री दारा सिंह चौहान ने प्रमुख सचिव वन को गुरुवार को कहा कि पहले तो वे हर जिलाधिकारी को पत्र भेजकर सरकारी जमीनों से कब्जा हटाकर उसपर पौधरोपण कराने की अपील करें। इससे हर जिले में काफी संख्या में पौधरोपण के साथ ही उस जमीन पर भविष्य में कब्जा करने की गुंजाइश भी कम हो जाएगी। इससे काफी संख्या में वन का विस्तार करने में सहायक होगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हर गांव से काफी संख्या में लोग बाहर रहते हैं। वे अपने खेतों को बटाई पर दे देते हैं। यदि उन्हें आश्वस्त किया जाय कि उनकी जमीन को कोई अधिग्रहित नहीं करेगा। साथ ही उनकी बटाई से जो मिलता है, वनावरण से उसकी अपेक्षा ज्यादा मिल सकता है। इसके साथ ही पर्यावरण को संतुलित बनाने में भी उनका योगदान होगा तो काफी संख्या में लोग वन विभाग को अपनी जमीन पौध रोपण के लिए दे सकते हैं। उन्होंने वन विभाग के सभी अधिकारियों को इस पर विचार करने के लिए कहा, जिससे भविष्य में इस पर अच्छा कार्य हो सकता है।







