वाम विचारक कर रहे आग लगाने की कोशिश
उपेन्द्र नाथ राय
लखनऊ, 28 जनवरी, 2020: नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के विरोध का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता जा रहा है। जैसे-जैसे बदलाव सामने आ रहा है, वैसे-वैसे पता चल रहा है कि सीएए विरोध सिर्फ एक बहाना है। इसी बहाने कुछ लोग एक वर्ग को सरकार के खिलाफ भड़काकर उसका फायदा उठा रहे हैं, हालांकि भाजपा भी विपक्ष और अन्य वाम विचारकों के इस रूख को सचेत निगाह से देख रही है और विपक्ष की इस मानसिकता में उसे भी अपना फायदा ही दिख रहा है। जानकारों की मानें तो विपक्ष व अन्य वामपंथी विचारकों द्वारा जितना सीएए पर विरोध किया जाएगा, उतना भाजपा को फायदा होगा।

कई वायरल विडियो में देखा गया है कि सीएए का विरोध करते-करते नेताओं ने भारत का विरोध करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार हर्ष वर्धन त्रिपाठी का कहना है कि यूपी में सीएए के बहाने कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने की साजिश चल रही थी। इसे यूपी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ध्वस्त कर दिया। इससे विपक्ष में बौखलाहट है और वह घंटाघर में महिलाओं को बरगलाकर प्रायोजित धरना के रूप में उजागर हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सीएए का विरोध तो एक बहाना है। यहां एक वामपंथी मानसिकता काम कर रही है। उसे तड़फड़ाहट है। वह हमेशा ही देश के विरोध में काम करते आ रहे हैं और इस समय अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं।

उसी सांस को जिंदा रखने के लिए वे इस समय सीएए के बहाने लोगों को बरगला रहे हैं लेकिन इस विरोध से भाजपा को ही फायदा होगा। लोग राजनीतिक मानसिकता को समझ रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार विजय पांडेय का कहना है कि सीएए के विरोध के कारण अर्थ का मुद्दा गौड़ हो गया। इससे भाजपा फायदे में आ गयी। सीएए के मुद्दे पर लोग आर्थिक मुद्दे को लोग भूल गये और इस समय राष्ट्रवाद के सवाल पर भाजपा के साथ दिख रहे हैं। स्थिति यह है कि यदि अभी चुनाव हाे जाय तो भाजपा पिछले अपने सारे रिकार्ड तोड़कर लोकसभा में 400 तक भी सीटें पा जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि कारण है कि भाजपा लखनऊ के घंटाघर जैसे विरोध प्रदर्शन को दबाना नहीं चाहती।







