लखनऊ विश्वविद्यालय के आइक्यूएसी विभाग ने डीपीए सभागार में विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के नैक मूल्यांकन के प्रोत्साहन एवं सहायता के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें 70 कालेजों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में राज्य सरकार के सभी शिक्षण संस्थानों के लिए नैक मूल्यांकन को अनिवार्य करने के और नैक मूल्यांकन का महत्त्व समझाने के सन्दर्भ में किया गया। कार्यक्रम में आइक्यूएसी निदेशक, प्रोफेसर राजीव मनोहर ने महाविद्यालयों को बिना डरे मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों को ग्रेड की चिंता करे बगैर नैक मूल्यांकन में जाना चाहिए तथा ईमानदारी से अपने अच्छे पक्ष को रखना चाहिए।
मुख्य वक्ता के रूप में, कानपुर विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर सुधांशु पांडिया ने विस्तृत रूप से नैक के नए दिशा निर्देशों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि नया प्रोफार्मा पूर्ण रूप से आईसीटी पर निर्भर है तथा अब डाटा को डिजिटल फार्म में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्रों को सुविधा संपन्न व्यवस्था प्रदान करना आज हमारी प्राथमिकता है।
कोर्स में सीबीसीएस की प्रणाली का होना इसका एक प्रमाण है। आईक्युएसी बोर्ड के सदस्य, प्रोफेसर अजय प्रकाश ने कॉलेजों के मूल्यांकन पद की एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। आईपीपीआर निदेशक प्रोफेसर दुर्गेश श्रीवास्तव कि अध्यक्षता में कार्यक्रम में लगभग सत्तर महाविद्यालयों ने भाग लिया और सफल रहा।







