अखिलेश यादव का बयान “भाजपा जाति के आड़ में अराजकता को बढ़ावा देने का काम कर रही है।” का जवाब दिया भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने
यह बहुत ही हास्यास्पद है कि जिनकी नींव ही सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़कर राजनीति चमकाने के आधार पर पड़ी, वे आज खुद सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करते हुए दूसरों को सौहार्द्र की शिक्षा दे रहे हैं। काश! अखिलेश यादव समाजवाद की परिभाषा पढ़ लेते तो भाजपा पर जातिवादी व्यवस्था हावी होने का मनगढन्त आरोप नहीं लगाते। समाजवाद का नाम देकर परिवारवाद की बुनियाद खड़ाकर राजनीति करने वाले अखिलेश यादव की तड़फड़ाहट उभरकर सामने आ रही है। ये बातें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने बुधवार को कही।
वे अखिलेश यादव द्वारा मंगलवार को दिये गये बयान “ भाजपा जाति के आड़ में अराजकता को बढ़ावा देने का काम कर रही है।” का बुधवार को जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि समाजवाद की परिभाषा बताने वाले आज परिवारवाद की नींव मजबूत कर रहे हैं। उसमें भी चाचा को भी बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं की। अपने पिता को किनारे लगाकर रातों-रात भूमिका बनाकर अध्यक्ष बन गये और वे आज लोकतंत्र की परिभाषा बता रहे हैं।
मनीष शुक्ला ने अखिलेश से पूछा कि आखिर वे अपने शासन काल में कौन सी राजनीति कर रहे थे, जिससे पूरे कार्यकाल के दौरान पूरा प्रदेश सांप्रदायिक हिंसा में सुलगता रहा। तीन सौ से अधिक साम्प्रदायिक दंगों के लिए कौन उत्तरदायी था। तुष्टिकरण की नीति के कारण सैकड़ों लोगों की जान चली गयी। उसके लिए क्या एक बार भी उन्होंने दुख जाहिर करने की कोशिश की।







