11 फरवरी से आंदाेलनरत थे कर्मी, किसी तरह का सकारात्मक आश्वासन न मिलने पर हड़ताल का लिया निर्णय
लखनऊ, 28 फरवरी, 2020: संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के तत्वावधान में 11 फरवरी से गांधीवादी आन्दोलन जारी है। इसके बावजूद सरकार द्वारा द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमंत्रित न किये जाने तथा किसी तरह का सकारात्मक आश्वासन न दिये जाने से नाराज समिति ने शुक्रवार को 29 फरवरी से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया।
विगत 11 फरवरी से आन्दोलनरत निगम के कार्मिकों एंव अधिकारियों द्वारा विभिन्न चरणों में सांकेतिक प्रदर्शन एवं अल्पकालीन कार्य बहिष्कार किया जा रहा था। आन्दोलनकारियों का कहना है कि जब केन्द्र सरकार ईपीसी मोड में तीन कार्यदायी संस्थाओं को नामित कर चुकी है तो उत्तर प्रदेश में केवल एक संस्था को कार्यदायी संस्था नामित कर प्रदेश सरकार दोहरा मापदण्ड क्यो अपना रही है।
संयोजक राज बहादुर सिंह ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से निगम के व्यवसायिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। लगातार 45 वर्षों से भवन निर्माण के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति प्राप्त लगातार लाभ अर्जित करने वाले इस निगम को अचानक बिना उच्च स्तरीय बैठक एवं नीति निर्धारण के ही बंदी की ओर ढकेलने वाला निर्णय लिया गया है। सरकार को निश्चित तौर पर एक वर्ष के भीतर अपनी इस गलती का आभास होगा लेकिन तब तक काफी विकास कार्य पिछड़ चुके होगे और सरकार को तब तक काफी वित्तीय क्षति हो चुकी होगी।
निगम मुख्यालय पर आयोजित सभा को संघर्ष समिति के सह संयोजक इं. संदीप कुमार सिंह, इं. नरेन्द्र कुमार, इं. मिर्जा फिरोज शाह, उमाकान्त, जागेश्वर प्रसाद,, मुकेश चन्द्र, रविराज सिंह,इं. एस.डी. द्विवेदी, ए.के. गोस्वामी, इसहाक अली, सुरेन्द्र कुमार और आशीष ने सम्बोधित किया।







