किसी भी काम के लिए कहीं न कहीं से शुरुआत करनी होती है। शुरुआत अगर कायदे से हो गई तो ऊंचाइयों तक पहुंचना मुश्किल नहीं रह जाता। स्टार्ट अप की अवधारणा भी इसी विचार पर आधारित है। काम शुरू करेंगे तो चुनौतियां आएंगी। उनका सामना करने से जहां जूझने की शक्ति बढ़ेगी तो दूसरी ओर अनुभवों की दृष्टि से भी समृद्धता मिलेगी। इसलिय ये कहना भी गलत नहीं होगा कि स्टार्ट अप किसी क्षेत्र विशेष के लिए नहीं बल्कि हर क्षेत्र के लिए है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का यह कहना सही है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्टार्टअप की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके लिए सभी विभाग अंतर्विभागीय समन्वय के आधार पर काम करें। उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों तथा कृषि विवि आदि से समन्वय स्थापित कर स्टार्ट अप कार्यक्रमों के लिए योजनाएं बनाई जाएं।
जिला स्तर पर स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने नोडल अधिकारी नामित करने का निर्देश भी दिया। चूंकि कोई भी उद्यम स्थापित करने का काम किसी एक विभाग के जिम्मे नहीं आता बल्कि उसके लिए कई विभागों की किसी न किसी रूप में जरूरत पड़ती है, इसलिए जरूरी है कि इसे जुड़े विभागों में अन्तर्विभागीय समन्वय स्थापित हो। कोई योजना के लिये मंजूरी देता है,कोई कनेक्शन देता है, कोई धनराशि स्वीकृत करने के लिए जिम्मेदार है तो कोई संबंधित उद्यम को बाजार में लाने के लिए लाइसेंस आदि स्वीकृत करता है।
अभी तक का अनुभव यही बताता है कि ये सभी काम आसानी से नहीं हो पाते। इंस्पेक्टर राज और बाबूशाही इसकी राह में आड़े आती है। यही कारण है कि शुरुआती वर्षों में स्टार्ट अप के तहत किए जाने वाले कार्यों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने कदम दर कदम आने वाली जरूरतों का समाधान करने पर जोर दिया है। निश्चित ही इससे स्टार्ट अप का मार्ग प्रशस्त होगा।







