जी के चक्रवर्ती
जैसा कि हम सभी लोगों के सामने 8 मार्च के दिन दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर से आईएस के एजेंट के रूप में काम कर रहे एक कश्मीरी दंपत्ति को गिरफ्तार किये जाने की खबर से एक बात यह साबित होता है कि कुछ समय पहले हमारे देश के खुफिया तंत्र इस बात आगाह हो चुकी थी कि आईएस जैसे खूंखार आतंकवादी संगठन के अड्डे हमारे पडोसी मुल्क तक पहुँच गए है और ऐसी जानकारियों के बीच उस वक्त यह आशंका भी व्यक्त की गयी कि अब आईएस का जाल हिंदुस्तान की धरती पर बिछने में देर नहीं लगेगी और अब उसी बात के फलीभूत होते हुये स्पष्ट तौर पर दिखने लगा है, जिसकी आशंका पहले ही जाहिर की जा चुकी है। आईएस अपने नुमाईंदों की सहायता से हमारे देश के कुछ महत्वपूर्ण इलाको में अपने हाथ पैर पसारने में कामयाब हो चुका हैं।ऐसे में यह बात समझ में नहीं आता है कि देश की जिम्मेदार संस्थानो को इस अवस्था में क्या करना चाहिये या क्या नही करना चाहिये था जैसी बातों पर इसके जिम्मेदार लोगों द्वरा क्या काम किया गया यह तो वही लोग जाने लेकिन एक बात तो निश्चित है कि देश के खुफिया संस्थान को इसके वावत बहुत सतर्कता और कड़ी निगरानी रखे जाने की जरुरत थी कि देश में इस तरह की कोई वारदात नहीं होने पाये फिर भी इस तरह की घटनाओं के घटित होने से यही साबित होता है कि देश की खुफिया तंत्र और उसके जिम्मेदार लोगों की शक्त चौकसी कितना कारगर साबित होगा यह तो वही लोग जाने लेकिन इसमें यही कहना पड़ता है कि देश में ऐसे लोगों के मौजूद रहते हुये यह कैसे संभव हुआ कि देश की राजधानी दिल्ली जैसी संवेदनशील जगह पर आईएस जैसे खूंखार आतंकवादी संगठन के पहले से ही मौजूद रह कर अब तक अपने काम को अंजाम देते रहे। इस दमपत्ति पर शक की सुई तब घूमी जब दिल्ली में CAA जैसे कानून पर विरोध स्वरूप धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों की आड़ लेकर कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने के फिराक में थे। इसी सिलसिले में कुछ दंगाइयों ने मौके का फायदा उठा कर धरने पर बैठे लोगों को उकसा कर दिल्ली में दंगा फैला कर देश की राजधानी का माहौल खराब करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।
इस तरह से दिल्ली में अचानक खराब हुये माहौल पर बहुत आश्चर्य उस वक्त होता है जब हमारे देश के खुफिया तंत्र को इस बात की तनिक भी भनक नही लगी और इसमें दूसरी बात यह भी है कि न जाने कब से इस दंपत्ति के अलावा भी न जाने कितने दूसरे एजेंट देश में छिप कर आईएस के नेटवर्क फैलाने में संलग्न है।ऐसी स्थिति में हमारे देश के खुफिया तंत्र को पहले से और ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत है इसके साथ ही यह भी पता लगाने की जरूरत है कि दिल्ली के वह कौन से लोग हैं? जिन्होंने इस दमपत्ति को दिल्ली में घर मोहिया करवा कर उन्हे मदद देना का काम किया है।
हमारे देश में कश्मीर से दिल्ली की दुरी निहायत कम तो नहीं है ऐसे में कश्मीर से दिल्ली पहुंचे इस दमपत्ति ने देश की राजधानी में अपने रहने का आशीयाना ढूंढ़ने जैसा काम एक- आध दिनों में तो कर नहीं लिया होगा उनके इस काम में मदत दिल्ली के ही किसी वासिंदे ने किया होगा। यह दमपत्ति मौजूदा समय के घर के पास ही रह रहे किसी पड़ोसी से मदत लेकर दिल्ली जैसी जगह में अपना आशियान बनाने में कामियाब हुये होंगे ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि आखिर वह लोग कौन हैं? वास्तव में देखा जाये तो इस तरह के कुछ लोग चंद रुपयों या अन्य प्रलोभनों में आकर अपने ही देश के साथ गद्दारी करने में नहीं चूकते हैं ऐसे ही लोगों ने हमारे देश को पहले मुगलों के हाथ और फिर अंग्रेजों के हाथों देश को गुलाम बनाने के लिये मजबूर किया हैं।
– यह लेखक के अपने निजी शोधपूर्ण विचार हैं







