Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, November 6
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सियासी द्वेष या सपा से आज़म को अलग करने की ज़िद!

    ShagunBy ShagunNovember 6, 2026 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 0

    नाम भी आज़म, मिज़ाज भी आज़म, सिद्धांत भी आज़म

    जाफ़र रज़ा साहिल

    उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी तानाशाही, राजनीतिक प्रतिशोध और व्यवस्था के हंटर का ज़िक्र होता है, तो जनाब मोहम्मद आजम खान साहब का नाम सबसे पहले ज़ेहन में उभर कर आता है, एक ऐसा जननेता जिसने अपनी मेहनत से रामपुर की बंजर और उपेक्षित सरज़मीन पर तालीम की एक अज़ीम मीनार यानी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी खड़ी की, लेकिन आज उसी शख़्स को सत्ता और तंत्र की चक्की में बेरहमी से पीसा जा रहा, अगर ये कहूँ कि पीस दिया गया तो गलत नहीं होगा। उत्तर प्रदेश की सियासत में उनके साथ जो सुलूक हो रहा है, उसे देखकर हर उस शख़्स का ज़मीर झंझोर उठता है जो संविधान, इंसाफ और इंसानियत में यक़ीन रखता है। जब एक अस्सी साल के बुज़ुर्ग नेता को एक मामले में राहत या ज़मानत मिलती है, और जेल के गेट से बाहर कदम रखते ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ई.डी. द्वारा उन्हें फौरन दोबारा गिरफ़्तार कर लिया जाता है, तो यह कानून का राज कम और किसी सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र का दृश्य ज़्यादा लगता है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला नहीं है, बल्कि उस हर लोकतांत्रिक आवाज़ का गला घोंटने की कोशिश है जो सत्ता के अहंकार के सामने झुकने से इनकार करती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही मे ई.डी. की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली मोहम्मद आज़म खान साहब की याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया और इससे जुड़े अतीत के पन्नों को पलटकर देखना बेहद डरावना और आंखें खोलने वाला है। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट, जिसमें डबल पैन कार्ड रखने जैसे मामलों में ज़मानत देने मे महीनों यानी पूरे 11 महीने लगा दिए गए थे, जहाँ कभी एक जज साहब ने खुद को सुनवाई से ही अलग कर लिया था और जब मामला दूसरे जज के पास पहुंचा तो सुनवाई शुरू होने से पहले ही अदालत से उठकर चले जाने जैसी अजीबोग़रीब स्थितियाँ पैदा हुईं, वहाँ न्याय की आस लगाना किसी लम्बी और घुटन भरी सुरंग से गुज़रने जैसा लगता है। अब जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट में होगी, तो तारीख पर तारीख मिलने का अंतहीन सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा, और इस बीच एक उम्रदराज़ शख़्स को जेल की चारदीवारी में घुट-घुटकर जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

    यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान, बेटे अब्दुल्लाह आजम वा पत्नी तंजीन फातिमा के साथ

    यह सब देखकर आम जनता के दिल में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या कानून सचमुच अंधा हो गया है या फिर उसे जानबूझकर एक आंख से देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है? जिस यूनिवर्सिटी ने हजारों-हज़ार गरीब और ज़रूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारा, उस इल्मी इदारे को तबाह करने और उसके बानी को मिटा देने के लिए राज्य की हर एक संस्था ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है। आलम यह है कि मुकदमों की फेहरिस्त इतनी लम्बी कर दी गई है कि बकरियों, भैंसों और छोटी-मोटी चीजों की चोरी जैसी अजीबोग़रीब और हास्यास्पद धाराएं भी एक यूनिवर्सिटी के संस्थापक, दस बार के विधायक दो बार के सांसद, पूर्व काबीना मंत्री पर मढ़ दी गईं, जिसे सुनकर दुनिया भर के न्यायविदों और बुद्धिजीवियों को भी अपनी आंखों और कानों पर यकीन नहीं होता। ऐसा लगता है कि व्यवस्था ने यह तय कर लिया है कि आज़म खान को चैन की सांस नहीं लेने दी जाएगी और उनकी हर रिहाई को एक नए मुकदमे के जाल में उलझा दिया जाएगा ताकि वे कभी जेल की सलाखों से बाहर न आ सकें।

    दूसरी तरफ, समाज के हर वर्ग (चाहे वह हिंदू हों या मुस्लिम) के दिलों में आज़म साहब की सेहत और उनकी लंबी उम्र के लिए दुआएं उठ रहीं हैं, क्योंकि जनता की अदालत में यह बात साफ तौर पर समझी जा रही है कि यह न्याय नहीं बल्कि शुद्ध रूप से राजनीतिक द्वेष और प्रतिशोध की आग है। जब मजहब और सियासत की दीवारों से परे उठकर आम लोग यह महसूस करने लगते हैं कि किसी के साथ नाइंसाफी की सारी हदें पार हो रही हैं, तो यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। न्यायपालिका और देश की तमाम बड़ी संस्थाओं को इस संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर गहराई से यह सोचना होगा कि क्या एक राजनीतिक हस्ती को झुकाने के लिए कानूनों का इस हद तक दुरुपयोग जायज़ है? बहुत से राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि
    सपा को कमज़ोर करने के उद्देश्य से सत्ता पक्ष आज़म साहब से सिद्धांतों से समझौता करने की कई कवायद कर चुकी पर आज़म तो आज़म ठहरे! ज़ुल्म सहने को तैयार हैं पर सिद्धांतों से कोई समझौता करने को तैयार नहीं।

    अगर आज एक कद्दावर नेता के साथ ऐसा सुलूक खुलेआम हो रहा है, तो कल किसी भी साधारण नागरिक के अधिकारों की रक्षा की क्या गारंटी बचेगी? यह आलेख सिर्फ आजम खान की दास्तां नहीं है, बल्कि यह इस व्यवस्था के माथे पर एक ऐसा सवालिया निशान है जिसका जवाब इतिहास और आने वाली पीढ़ियां जरूर मांगेंगी, क्योंकि जब-जब जुल्म और राजनीतिक बदले की भावना इंसाफ की कुर्सी पर हावी होगी, तब-तब इंसानियत और लोकतंत्र का विवेक झकझोरे बिना नहीं रहेगा।

    Shagun

    Keep Reading

    आखिर लोकतंत्र को वास्तव में किससे खतरा?

    The Price of His Whims: Trump’s Defeat and America’s Message

    अपनी सनक का खामियाजा: ट्रंप की हार और अमेरिका का संदेश

    Power on the Streets: Democracy’s Inverted Flow

    सत्ता सड़क परः लोकतंत्र की उलटी गंगा

    Bulletproof Glass for Artists: A Serious Question Regarding Law and Order

    कलाकारों का बुलेटप्रूफ कांच: कानून-व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल

    आग ही क्यों? जब घर की चारदीवारी में ही महिलाओं की सुरक्षा पर उठने लगे सवाल!

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    सियासी द्वेष या सपा से आज़म को अलग करने की ज़िद!

    November 6, 2026

    आखिर लोकतंत्र को वास्तव में किससे खतरा?

    November 5, 2026
    The Price of His Whims: Trump’s Defeat and America’s Message

    अपनी सनक का खामियाजा: ट्रंप की हार और अमेरिका का संदेश

    November 5, 2026
    A ‘Chhath Geetmala’ (garland of songs) featuring seven songs will be released for the Chhath festival.

    छठ पर्व पर सात गीतों की ‘छठ गीतमाला’ होगी रिलीज

    November 5, 2026
    Candidates for the 68,500-teacher recruitment protest at the minister's residence; express frustration over the lack of dialogue.

    68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का मंत्री आवास पर प्रदर्शन, वार्ता नहीं होने से नाराजगी

    November 5, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading