लोगों के आपसी दूरी की सूचना पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा, यह विवेकानंद का देश है, नष्ट नहीं हो सकती अपनी संस्कृति
लखनऊ, 29 मार्च, 2020: कोरोना महामारी को लेकर भय का माहौल भी बनता जा रहा है। बाजार में कई बार यह देखने को मिल रहा है कि खुद को व्यक्ति ठीक समझते हुए अगले को कोरोना संक्रमित के रूप में देख रहा होता है। कई बार तो घरों में भी ऐसी स्थिति नजर आ जा रही है। ऐसे में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाक्टर सतीश द्विवेदी ने कहा कि यदि किसी को कोराना का संक्रमण भी हो तो उससे शारीरिक दूरी बनाने की जरूरत है, दिलों की दूरी नहीं होनी चाहिए। हमारा देश भावना प्रधान है। यहां अपनत्व का जो भाव है, वह कूट-कूटकर भरा हुआ है। वह किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं किया जा सकता।
डाक्टर सतीश द्विवेदी ने कहा कि यहां विवेकानंद जैसी महान विभूतियां हुईं, जिन्होंने 1899 में प्लेग महामारी के वक्त पीड़ितों की सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन की समिति बनाई थी। उन्होंने कहा था “ आपकी सेवा व देखभाल करते हुए यदि हम समाप्त भी हो जाएं तो खुद को खुशनसीब मानेंगे, क्योंकि आप सभी ईश्वर की अभिव्यक्ति हैं।” वे प्लेग जैसी महामारी में रोगियों की सेवा में पूरा आश्रम के साथ लग गये। आज भी हजारों की संख्या में स्वयं सेवक, डाक्टर कोरोना संदिग्ध व अन्य की सेवा में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है, हर व्यक्ति को एक शारीरिक दूरी के साथ ही डाक्टर की सलाहों को मानने की। साफ-सफाई की लेकिन इससे भयाक्रांत होने या अपनों से ही दिल की दूरी भी बना लेने से समस्या को कोई हल नहीं निकल सकता। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना का संदिग्ध है तो उसके साथ और भावनात्मक लगाव की जरूरत है, जिससे उसको सबल मिले और वह जल्द ठीक हो जाए। हां, शारीरिक दूरी को हमेशा ख्याल रखना और साबुन से हाथ धोने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।







