आपदा:
आपदा चोर बनकर न जाने कहाँ से आ जाती है
देखते-देखते ही वह तिल का पहाड़ बना देती है ।।
हम सोचते रह जाते है कि कैसे इसको टाले
लेकिन वह इतनी शैतान है सबको उठा ले जाती है ।।
कभी तूफ़ान, कभी बाढ़, कभी सुनामी बनकर आती है
कभी बर्फ़बारी,तो कभी भांग के शोलें बरसा जाती है ।।
देश दुनिया में इसका असर छा जाता है
इसकी बढ़ती चाल को रोक पाना मुश्किल हो जाता है ।।
अनेक उपायो से इसकी रोकथाम की जाती है।
किन्तु लाखों को अनेक बीमारियों में लिटा जाती है
पहली बार इस आपदा का नाम सुनने से आया है ।।
सभी हैरान हैं यह कोरोना कहाँ से आया है।
एक नही, दो नही, अनेक देश इसकी चपेटे मे हैं।
हम और हमारा देश भी इस महामारी के लपेटे में है।
लाखों लोगों की जान पर क़यामत बन आयी है।।
न जाने आफत बनकर यह कहाँ से आयी है.
करे हम सब मिलकर कोशिश इससे भाग जाने की।।
तभी मिलेगी राहत की साँस दुनिया वालो को.
हम सभी कर रहे दुवां उन तमाम मददगारों की।
जो लोग लगे है रात- दिन सेवा मे उन तमाम बीमारो की
हमे जरूरत है सजग, सतर्क व सावधान रहने की।
एक दिन जीतेगे हम, बचा लेगे देश को इस महामारी से।
तेजनरायन निगम,
एडवोकेट-
M.No:- 9235489145






