नयी दिल्ली, 15 अक्तूबर। ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता गौरी सावंत ने पुरष या महिला कहे जाने से इनकार करते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को अपनी वास्तविक पहचान हासिल करने से पहले लंबा सफर तय करना है।
हाल में यहां आयोजित हिजडा हब्बा में 37 वर्षीय ट्रांसजेंडर मां ने कहा, अगर लोग हमें स्वीकार करना चाहते हैं तो उन्हें ट्रांसजेंडर के तौर पर स्वीकार करना चाहिए।
कार्यक्रम का आयोजन ट्रांसजेंडरों के सामाजिक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन इंडिया एचआईवीाएआईडीएस अलाइंस ने स्लेक्ट सिटी वॉक के साथ मिलकर किया था।
भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय को वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय ने तीसरे लिंग के तौर पर पहचान दी थी। गौरी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी सहित ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं की याचिका पर प्रसिद्ध एनएएलएसए फैसला आया था ।
न्यायालय ने यह भी कहा था कि शिक्षा और नौकरियों में ट्रांसजेंडरों को आरक्षण दिया जाएगा।
गौरी ने कहा कि ऐतिहासिक निर्णय को आए तीन साल हो गए लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों की मानसिकता बदलने में बहुत वक्त लगेगा।
उन्होंने कहा, अगर लोगों ने मुझे एक मां के तौर पर स्वीकार किया है। उन्हें हमें कार्यस्थलों पर भी स्वीकार करना होगा तथा हमें और मौकें देने होंगे।
गौरी ने गायत्री नाम की एक बच्ची को गोद लिया है जिसे कोलकाता में सोनागाची के लेड लाइट इलाके में बेचा जाने वाला था।
गौरी ने पीटीआई भाषा से कहा, मैंने बच्ची को यह दिखाने के लिए गोद लिया है कि हम भी मां बन सकते हैं। मैंने यह अपने न्याय के लिए किया, अपने अधिकरों के लिए किया ताकि लोग हमने स्वीकार कर सकें।
उन्होंने कहा, कानून ने हमें ट्रांसजेंडर के तौर पर पहचान दी है। यह वह है जो मैं हूं। मैं कोई एलियन नहीं हूं।
पिछले महीने वह लोकप्रिय कार्यक्रम कौन बनेगा करोडपति में आई थीं। इस कार्यक्रम की मेजबानी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन करते हैं।
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