सीएए पर झूठ फैलाकर संप्रदाय विशेष को भड़काने की कोशिश कर रहे अखिलेश: भाजपा

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  • सपा प्रमुख के रोगी सरकार कैंपेन पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने दिया बयान
  • चंद्रभूषण पांडेय ने अखिलेश से पूछा, क्या वे अपने राज में हुए 134 से ज्यादा दंगों को भूल गये

लखनऊ, 04 जनवरी 2020: भाजपा सुशासन समिति के प्रदेश अध्यक्ष और प्रवक्ता चंद्र भूषण पांडेय का कहना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद सपा मुखिया बौखला गये हैं। इसी कारण वे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के मामले में झूठ फैलाकर एक संप्रदाय विशेष को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े तेवर दिखाने के चलते अराजक तत्वों पर काबू पाये जाने के बाद से ही वे लगातार कोशिश कर रहे हैं कि पुन: यूपी में उपद्रव फैल जाये लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह सुशासन की सरकार है। यह सपा की सरकार नहीं है, जिनके कार्यकाल में 134 से ज्यादा सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

पांडेय ने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले अखिलेश व अन्य विपक्षी यह भूल गये कि सीएए संसद में पास हो चुका है। अब उसका विरोध भी संविधान का विरोध करना है। उनका यह बयान अखिलेश यादव द्वारा शुक्रवार की शाम ट्वीटर पर ‘रोगी सरकार’ नाम से चलाए गये कैंपेन के बाद शनिवार को आया है। उसमें सपा प्रमुख ने ट्वीट किया “प्रदेश की ‘रोगी सरकार’ ने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप प्रदान कर दिया है। पुलिस प्रशासन के उच्च पदों के लिए जब भाजपा अधिकारियों से ‘रेट-लिस्ट’ बनाकर वसूलेगी, तो अधिकारी भी पद पाकर जनता से ही वसूलेंगे। भ्रष्टाचार की इस चक्की में आख़िरकार गरीब-बेबस जनता ही पिसेगी।

चंद्रभूषण पांडेय ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या वे अपने कार्यकाल में हुए मुजफ्फरनगर का दंगा भूल गये, जिसमें 50 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा था। वे मथुरा में रामवृक्ष यादव द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा और कोर्ट के निर्देश पर जमीन से कब्जा हटाने के प्रयास में पुलिस अधिकारियों की हत्या का वाकया भूल गये। उसमें मथुरा के एसपी को भी जान गवांनी पड़ी थी। अखिलेश यादव बदायूं में दो नाबालिग बहनों की रेप के बाद हत्या, उसके बाद आजम खान द्वारा दिए बयान को भूल गये, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाई थी। वे शाहजहांपुर में पत्रकार गजेंद्र सिंह की जलाकर की गयी हत्या को भूल गये।

चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि अखिलेश को यह याद रखना चाहिए कि यह सुशासन की सरकार है। यहां भ्रष्टाचार न हो सकता है और न ही भ्रष्ट अधिकारी यहां काम कर सकते हैं। वे अपने शासन काल के भ्रष्टाचार को याद करें, जब नोएडा अथारिटी में भ्रष्टाचारी यादव सिंह को बचाने के लिए सीबीआई जांच न हो, इसके लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट तक गयी थी। वहां से भी लताड़ मिली और अंत में सीबीआई जांच की अनुमति कोर्ट ने दी।

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