लखनऊ, 12 दिसंबर: बाबासाहेब आंबेडकर यूनिवर्सिटी का नाम सुनते ही डॉ. आंबेडकर का सपना याद आता है, लेकिन इन दिनों कैंपस में जो हो रहा है, वो सपने को कलंक लगा रहा है।
गुरुवार शाम उस वक्त कैंपस में खौफ फैल गया जब एक सुरक्षा गार्ड ने इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर गजानन पाण्डेय पर बंदूक तान दी! प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धरने के दौरान गहमागहमी में अचानक गार्ड ने हथियार निकाला और प्रोफेसर की ओर तान दिया। चीख-पुकार मच गई, छात्र-छात्राएं सहम गए। किसी तरह लोगों ने बीच-बचाव किया, वरना बड़ा हादसा हो जाता। इस घटना का वीडियो वायरल है।
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दलित छात्र का अनशन जारी
बता दें कि और ये पहला झटका नहीं है। उसी कैंपस में दलित शोधार्थी बसंत कुमार कनौजिया पिछले 24 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आरोप गंभीर हैं, प्रो. गोविंद पांडेय पर यूनिवर्सिटी के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल को अपना निजी प्रचार तंत्र बनाने, बसंत के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने, उनकी फेलोशिप रोकने और बिना जांच निष्कासित करने के मामले वायरल हैं। बसंत कहते हैं, “मैं सिर्फ बाबासाहेब के संविधान की बात कर रहा था, बदले में मुझे कुचलने की कोशिश हुई।”

मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को बसपा का पूरा प्रतिनिधिमंडल धरने पर पहुंचा और खुल कर समर्थन दे दिया। छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सबकी एक ही एक मांग है – न्याय चाहिए, जातिवाद नहीं! कैंपस में बंदूकें तन रही हैं, छात्र भूखे बैठे हैं, और सवाल एक ही है कि बाबासाहेब के नाम वाले विश्वविद्यालय में बाबासाहेब के विचारों का ये हाल क्यों?







