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जी क़े चक्रवर्ती
आज हम देश की आजादी के 71वें वर्ष का जश्न हर्षो उल्लास के साथ मना रहे है। जब हम देश की आजादी की बात करते हैं तो उन बीते दिनों में घटित हुये घटनाओं के इतिहास के दर्पण में झांकने पर यादें सजीव हो उठती है। इस ब्रह्मांड की प्रत्येक प्राणी के मध्य स्वत्रंता की भावना निहित होती है, चाहे वह पशु पक्षी हो या मनुष्य उसे पराधीनता स्वीकार नही है।
आप और हम में से बहुत लोगों को शायद यह पता नही होगा कि भारत के साथ ही तीन ऐसे देश और भी हैं, जो इसी दिन अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं, क्योंकि 15 अगस्त के ही दिन इन देशों को भी परतंत्रता से स्वतंत्रता मिली थी। वह देश जो 15 अगस्त को अपनी स्वतंत्रता दिवस मानते है, उनमें दक्षिण कोरिया, बहरीन एवं कांगो का नाम शामिल है। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि दक्षिण कोरिया ने जापान से 15 अगस्त, 1945 को, बहरीन ने ब्रिटेन से 15 अगस्त, 1971 को और कांगो ने फ्रांस से 15 अगस्त, 1960 को आजादी हासिल की थी। तब से इन देशों में भी प्रतिवर्ष 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया जाता है।
यह उन दिनों की बात है जिस वक्त भारत गुलामी के परतंत्रता की जंजीरों में जकड़ा स्वतंत्रता के लिए छटपटा रहा था। इतिहास में दर्ज उन दिनों घटित हुई घटनाओं की याद ताजा होते ही हमारे दिलों दिमाग मे व्यथा एवं कष्टों की शूल सी चुभन उत्पन्न होने लगती है। यह उन दिनों कि बात है जब यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही धीरे-धीरे भारतीय उपमहाद्वीप में अपने पैर जमाने शुरू कर दिये थे।
इन यूरोपिय व्यपारियों ने धीरे-धीरे भारत मे अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोत्तरी करते हुए ईस्ट इण्डिया कंपनी ने 18वीं सदी के अन्त तक भारत के स्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत करने के पशयचात उस पर अपना शासन सत्ता स्थापित कर लिया था।
सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कि लड़ाई के बाद भारत सरकार अधिनियम एक्ट 1858 के अनुसार भारत पर सीधा ब्रिटानी ताज (ब्रिटिश क्राउन) अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का आधिपत्य हो गया।
भारत की गुलामी का कोई विशेष दिनांक या वर्ष नहीं बताया जा सकता है लेकिन 1757 (प्लासी की लड़ाई) के बाद से भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ता चला गया क्योंकि प्लासी की लड़ाई में बंगाल जैसा बड़े क्षेत्र में ब्रिटिशों ने अपना कब्जा जमा लिया था जिसके कारण अंग्रेज धीरे-धीरे भारत के अन्दर तक बसे अन्य हिस्सों पर भी अपनी पकड़ बनाने में सफल रहे व भारत की शासन सत्ता पर वर्ष 1947 तक काबिज रहे।
इस तरह हमारे देश मे अंग्रेजो का शासन का दौर 200 वर्षों तक चलता रहा। यद्दपि भारत की गुलामी की शुरुआत 1600 ई. से ही शुरू हो चुकी थी जिसमें डच, फ्रांस, पुर्तगाल, ईस्ट इंडिया कंपनी, ब्रिटिश राज सभी ने भारत के अलग अलग हिस्सों पर राज किया लेकिन केवल ब्रिटिश राज ही सम्पूर्ण भारत को गुलाम बनाने में सक्षम हुई और अंग्रेजो ने वर्ष 1857 से लेकर वर्ष 1947 तक भारत मे राज किया। जबकि सबसे पहले वर्ष 1857 में पहली बार स्वतंत्रता संघर्ष हुआ था जो कि असफल रहा।
उसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को अंग्रेजी हुकुमत में परिवर्तित कर दिया। उस वक्त तक भारत बहुत से छोटे-छोटे रियास्तों में बंटा हुआ था इसी कारण व्यापार के उद्देश्य से भारत देश मे आई संगठित ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भोले-भाले भारतीयों के मध्य आपसी फूट डाल कर एक दूसरे को आपस मे लड़वा कर सम्पूर्ण भारत में अपना कब्जा बना लिया। उन दिनों भारत के पास बंदूके तोप-गोले हथियारों की अत्यंत कमी थी। भारतीय राजा आपस मे एक दुसरे राजा के प्रति द्वेष की भावनाओं से भरे हुए थे जिसके कारण यह रियासतें आपस में कभी भी संगठित नही हो सकी और इसी आपसी फूट के कारण भारतवासियों के दासता एवं अंग्रजो के गुलाम बनने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सन 1946 में ब्रिटेन की लेबर पार्टी (सरकार) का भारत में राजकोष, हाल ही में समाप्त हुए द्वितीय विश्व युद्ध के कारण खस्ता हाल हो चुका था। उसी वक्त ब्रिटिश सरकार को यह एहसास हुआ कि न तो उनके पास अपने भारतीय घर पर जनादेश था और न ही अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जिसके कारण वे तेजी से आजादी पाने के लिए बेचैन होते भारत को नियंत्रित करने के लिए देशी बलों की विश्वसनीयता को भी खो चुके थे, जिसके कारण फ़रवरी वर्ष 1947 में प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने यह घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 से भारत देश को पूर्ण आत्म-प्रशासन का अधिकार प्रदान करेगी।
अंग्रेजी सरकार ने ब्रिटिश भारत को दो राज्यों में विभाजित करने के विचार को 3 जून 1947 को स्वीकार कर लेने के साथ ही यह भी घोषित किया कि उत्तराधिकारी सरकारों को स्वतंत्र प्रभुत्व दिया जाएगा और उन्हें ब्रिटिश राष्ट्रमंडल से अलग होने का पूर्ण अधिकार होगा। लेकिन अंतिम वायसरायलॉर्ड माउंटबेटन ने राजपाठ को वापस भारत को देने की तारीख को आगे बढ़ा दिया, क्योंकि उन्हें ऐसा लगा कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लगातार विवाद के कारण अंतरिम सरकार का किसी भी वक्त पतन हो सकता है।
उस समय ब्रिटिश सरकार ने भारत को सत्ता हस्तांतरण की तिथि के रूप में, द्वितीय विश्व युद्ध, में अंग्रेजो के समक्ष जापान के आत्मसमर्पण करने की दूसरी सालगिरह 15 अगस्त को चुना और इस तरह भारत को बहुत से अवरोधों को पार करने के बाद स्वत्रंत्रता प्राप्त हुई। 15 अगस्त सन् 1947 में आजादी के बाद भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया उस वक्त से 26 जनवरी को देश मे गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

देश की आजादी के लिए जो हंसते-हंसते फांसी के तख्ते पर झूल गए। जिनके लिए देश की आजादी उनकी जान से ज्यादा मूल्यवान थी। ऐसे देशभक्तों में एवं आजादी के मतवालों में सरदार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, अश्फाकुल्लाह खान जैसे वीर स्वत्रंत्रता संग्राम सेनानियों के वलिदान की मर्यादा रखते हुए भारत की आजादी की मूल्य को सम्मान पूर्वक संभालते हुए देश को स्वतंत्रता दिलवाने में अहम भूमिका निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की आहुति की कृतज्ञता बोध करने के साथ देश को उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाने एवं उसकी अखण्डता को बनाये रखने के लिए हम सदैव तत्पर और कृतसंकल्प रहें। आज स्वत्रंत्रता के जश्न के साथ शादिदों को याद के उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करके हम अपने आपको गौरवान्वित महसूश करते हैं।
हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा। –अल्लामा इकबाल
सरफरोसी की तमन्ना, अब हमारे दिल मे है। -रामप्रसाद बिस्मिल