प्यास बुझाने जंगली जानवर रात के अंधेरे में कर रहे गांवों का रूख

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file photo
प्रचंड गर्मी की तपिश से तालाब सूखे, घरों से निकलने वाले गंदे पानी को पीकर बुझा रहे प्यास

मिश्रिख (सीतापुर), 21 अप्रैल 2019: आसमान से आग उगलते सूरज ने गर्मी का प्रचंड रुप अभी से ही दिखाना शुरू कर दिया है। सूरज की तपिश से आम जनता पूरी तरह बेहाल हो रही है। प्रचंड गर्मी की तपिश से भूमि का जलस्तर बहुत तेजी से घट रहा है। यहां के सभी तालाब सूखे पड़े हैं।

पशु पक्षी जीव जंतु प्यास के मारे तड़प रहे हैं। जंगली जीव जंतु अपनी प्यास बुझाने हेतु रात के अंधेरे में गांवों का रुख कर रहे हैं और घरों से निकलने वाले गंदे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार लोग इन सूखे तालाबों में जल भरवाने की कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं। जबकि गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष भीषण गर्मी का प्रकोप अप्रैल माह के मध्य से ही शुरू हो गया है। भूमि का जल स्तर घटने से सरकारी नलकूपों की धार में जहां कमी आयी है। वहीं घरों में लगे नल पूरी तरह से ठंडे होने की कगार पर चल रहे हैं। जब यह हाल अभी से है तो मई जून में क्या स्थिति होगी यह अभी से देखकर ही अन्दाजा लगाया जा सकता है।

विकासखण्ड मिश्रिख की 71 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण हेतु शासन द्वारा लाखों रुपयों की धनराशि से निर्मित कराये आदर्श एवं मॉडल तालाब सूखे पड़े हैं। वहीं यहां का सेवरी नाला, बेंता नदी के साथ ही सभी नहरें भी जल बिहीन चल रही हैं। जिससे रात के अंधेरे में जंगली जीव जन्तु अपनी प्यास बुझाने हेतु गॉवों में घुसकर घरों से निकलने वाले गंदे जल को पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। फिर भी पंचायत बिभाग के जिम्मेदार ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।

समय रहते अगर शासन प्रशासन द्वारा इन सूखे तालाबों व नहरों में जल आपूर्ति की उचित व्यवस्था न करायी गयी तो यहां पर भी पंजाब प्रान्त की तरह जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इस सम्बध में खण्ड विकास अधिकारी से जब बात की गई तो उन्होंने बताया है कि ग्राम पंचायतों के तालाबों की सूची बनाने का आदेश दे दिया गया है। शीघ्र ही जल आपूर्ति की करा दी जायेगी।

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