उत्तर प्रदेश में नहीं होंगे आरटीई एक्ट के अंतर्गत दाखिले!

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अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने कहा: 6 वर्षों की जब तक बकाया प्रतिपूर्ति का भुगतान निजी स्कूलों को नहीं दिया जाता, तब तक नहीं होंगे एड्मिशन  

लखनऊ, 18 मार्च 2019: अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि क्योंकि सरकार ने पिछले 6 वर्षों से निजी स्कूलों में आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान आरटीई अधिनियम 2009 के नियमों के अनुसार अभी तक नहीं किया है। इसलिए स्कूल में शैक्षणिक सत्र 2019 -2020 में एक भी नया दाखिला आरटीई अधिनियम के तहत नहीं लेंगे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पहले से पढ़ रहे किसी भी बच्चे को निकाला नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी जो सरकार द्वारा मनमानी धनराशि 450 रूपए प्रति माह का भुगतान कुछ स्कूलों को किया भी गया है। वह आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12 (2 ) एवं सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के खिलाफ और देश के कानून का उल्लंघन है कि स्कूलों में हो रहे प्रति छात्रों के संबंध में नहीं है।

यह बताएं कारण:

  • अनिल अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (2 ) एवं सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के निर्णय में साफ तौर पर वर्णित है कि सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र एवं निजी स्कूलों के प्रति छात्र फीस में जो भी धनराशि कम होगी। उसी धनराशि का भुगतान शिक्षा विभाग निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति के रूप में देगा। अन्यथा संविधान के अनुच्छेद 19 (जी) के अंतर्गत निजी स्कूलों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा।
  • उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा के अधिकार नियमावली 2011 के नियम 8 (2 ) में सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र वर्ग की गणना का फार्मूला भी दिया गया है। जिसके अनुसार शासन को हर वर्ष 30 सितंबर को सरकारी स्कूलों में हो रहे हैं प्रति छात्रों को घोषित करना है।
  • उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि आज तक शिक्षा विभाग ने पिछले 6 वर्षों में किसी भी वर्ष की 30 सितंबर यानी कि (1) सितंबर 2013 (2 ) सितंबर 2014 (2 ) सितंबर 2015 (3) सितंबर 2016 (4) सितंबर 2017 (5) सितंबर 2017 तथा (6 ) सितंबर 2018 को सरकारी स्कूलों में हो रहे प्रति छात्रों को घोषित नहीं किया है।
  • उन्होंने एक प्रेस नोट के माध्यम से कहा, क्योंकि अभी तक पिछले 6 वर्षों की बकाया धनराशि का भुगतान अधिनियम की धारा 12 (2) के अनुसार नहीं हुआ इसलिए इस वर्ष निजी स्कूल दाखिले नहीं देंगे।
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