- मीजल्स – रूबेला के लिए राज्यस्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला शुरू
- टीकाकरण के दौरान सभी विभागों की सहभागिता की अपील की
लखनऊ, 17 जुलाई 2018: राजधानी में मंगलवार को दो दिवसीय मीजल्स–रूबेला पर राज्यस्तरीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में प्रदेश के 16 जिलों के टीकाकरण अधिकारी उपस्थित हुए। कार्यशाला के दौरान सितम्बर में शुरू होने वाले मीजल्स–रूबेला अभियान को जमीनी स्तर सुचारू रूप से चलाने के लिए विस्तार पूर्वक चर्चा हुई।
कार्यशाला में अधिकारियों ने बताया कि मीजल्स–रूबेला टीकाकरण के दौरान छात्र-छात्राओं के साथ अविभावक भी रह सकेंगे। राज्यस्तरीय अधिकारीयों ने यह भी बताया कि महिला एवं बाल विकास, गृह, पंचायती, ग्रामीण विकास, शिक्षा, सूचना एवं जनसंपर्क, श्रम, खेल, रेलवे और अल्पसंख्यक समेत कई विभागों के जिलास्तरीय अधिकारियों को टीकाकरण में सहयोग करने के लिए पत्र लिख जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि मीजल्स–रूबेला के प्रति जिले में बेहतर तरीके से टीकाकरण अभियान सफल हो इसके लिए प्रदेश के 75 जिलों को चार हिस्सों में बांटा गया है। इसकी शुरुआत गोमती नगर स्थित होटल में 17-18 जुलाई की कार्यशाला से की गई है। इस दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान टीकाकरण में आने वाली व्यावहारिक समस्यों के हल पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार, फैमिली वेलफेयर की डी०जी० डॉक्टर नीना गुप्ता, जी०एम०आर०आई० विकास सिंहल, राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ एपी चतुर्वेदी समेत 16 जिलों के डीआईओ, डीएचईआईओ और मेडिकल ऑफिसर आदि उपस्थित हुए।
7.64 करोड़ बच्चों का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में मिजिल्स-रूबेला बिमारी को रोकने के लिए 24 सितम्बर से मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू किया जायेगा. पांच हफ्ते तक चलने वाले इस अभियान में प्रदेशभर के लगभग 7.64 करोड़ बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य है। अभियान समाप्त होते ही यह MR वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल कर लिया जायेगा। जिन बच्चों को पहले खसरा का टीका लगा है उनको दोबारा यह टीका लगवाना हैं क्योंकि ये एमआर अभियान के अंतर्गत अतिरिक्त टीका है जिसे प्रदेश के प्रत्येक नौ माह से पन्द्रह वर्ष तक के बच्चों को दिया जाना आवश्यक है।
खतरनाक रुबेला
रुबेला बीमारी खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह बीमारी हवा में काफी तेजी से फैलती है। इसका वायरस सिर्फ इंसानों से ही फैलता है । वैसे तो रुबेला से हल्का बुखार और ददोरे जैसे दाने होते है लेकिन अगर गर्भवती महिलों में यह बीमारी हो तो बच्चा अपंग पैदा हो सकता है। इस स्थिति को कांजेनाइटल रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) कहते हैं। ऐसे बच्चे में कान और आंख से सम्बन्धित विकृतियां होते हैं या फिर दिमागी तौर पर कमजोर, कई बच्चों में यह मधुमेह का कारण भी बन सकता है और इन सबके लिए उम्र भर दवाई लेनी पड़ती है।







