लोकमान्य तिलक के उद्द्घोष के अर्थ को समझना होगा: योगी आदित्यनाथ

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लोकमान्य तिलक का उद्द्घोष भारत की स्वतंत्रता की सिंहगर्जना थी: राज्यपाल


तिलक के नारे से जनसामान्य में ऊर्जा और जागृति आई: फडणवीस


लखनऊ: 30 दिसम्बर, 2017: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में आज लोक भवन में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के अमर उद्घोष ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्व अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा‘ के एक सौ एक वर्ष पूर्ण होने पर स्मृृति समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस उपस्थित थे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायन दीक्षित, उप मुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य एवं डाॅ. दिनेश शर्मा, मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी राज्यमंत्री श्रीमती अनुपमा जायसवाल, नीलकंठ तिवारी, संदीप सिंह, पुणे की महापौर, मुक्ता तिलक, लोकमान्य तिलक के प्रपौत्र श्री शैलेश तिलक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उनके परिजन, शहीदों के परिजन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्रायें उपस्थित थें। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र सरकार के बीच ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की दृष्टि से सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये। कार्यक्रम में स्मारिका ’लोकमान्य’ एवं प्रो. अरूण तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक ’ए मार्डन इण्टर प्रटेशन आॅंफ लोकमान्य तिलकस्् गीता रहस्य’ का लोकार्पण भी किया गया।

राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दिसम्बर 1916 में लखनऊ में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में लोकमान्य तिलक का अमर अजर उद्द्घोष भारत की स्वतंत्रता की सिंहगर्जना थी। 1857 के स्वतंत्रता समर में उत्तर प्रदेश की अग्रण्ी भूमिका रही है। लोकमान्य तिलक ने सामाजिक एवं संस्कृृतिक रूप से देशवासियों को एक सूत्र में बांधने तथा जनजागृृति निर्माण करने के लिए उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश उत्सव और शिवाजी जयंती का शुभारम्भ किया। मण्डाला के जेल में रहते हुए उन्होंने गीता रहस्य जैसा अद््भुत ग्रन्थ लिखा लोकमान्य के लेखों से लोगों को स्वाधीनता अन्दोलन की प्रेरणा मिलती थी। उन्होंने कहा कि अंगे्रज लोकमान्य तिलक को ’असंतोष का जनक’ कहते थे।

श्री नाईक ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर पर आदान-प्रदान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का रिश्ता बहुत पुराना है। भगवान राम का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था पर वनवास के समय पर वे नासिक के पंचवटी में रहे थे। शिवाजी को महाराष्ट्र में कुछ सरदार छत्रपति राजा मानने के लिए तैयार नहीं थे। काशी से आमंत्रित पण्डित गागा भट्ट ने शिवाजी का राज्याभिषेक कराया तो उन्हें छत्रपति की मान्यता मिली। संगीत के क्षेत्र में महाराष्ट्र के पंडित विष्णुनारायण भातखण्डे ने लखनऊ को अपनी साधना स्थली बनायी तथा देश का एक मात्र भातखण्डे संगीत संस्थान की स्थापना की उन्होंने कहा की मुुंबई देश की आर्थिक राजधानी उत्तर प्रदेश के लोगों के परिश्रम से बनी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल को आयोजन के लिए ’प्रेरक’ बताया। उन्होंने कहा कि जो कौम अपना इतिहास नहीं सजो सकती, वह अपना भूगोल भी सुरक्षित नहीं रख सकती। आज का कार्यक्रम वर्तमान को प्रकाश दिखाने वाला समारोह है। लोकमान्य तिलक के उद्द्घोष के अर्थ को समझना होगा। महापुरूषों ने जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करके संघर्ष के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य किया। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है संविधान के प्रति आदर व सम्मान का भाव व्यक्त करने के लिए ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ को साकार करने की जरूरत है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सकारात्मकता को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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