जवाबी जुबानी जंग : अखिलेश यादव के बयान “किसानों की दोगुना आय करना दिवास्वपन” के जवाब में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रभूषण पांडेय ने दिया जवाब, कहा, भाजपा के सुशासन व किसानों की खुशहाली से घबरा गये हैं अखिलेश
आज किसानों के मृदा की जांच की व्यवस्था हो या किसानों के धान, गन्ना या गेहूं के क्रय का मामला, हर कार्य पारदर्शी ढ़ग से चल रहा है। बुंदेलखंड को तो सपा और बसपा की सरकारों ने सिर्फ वोट बैंक का जरिया बनाकर वहां के लोगों को पानी, सड़क व अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तड़पने के लिए छोड़ दिया था। आज वहां विकास की धारा बह रही है। अपने लुट का नजरिया और “हल्लाबोल” जैसी कृत्य करने वाली पार्टी के मुखिया होने के कारण अखिलेश को विकास नहीं दिख रहा। ये बातें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रभूषण पांडेय ने कही।

वे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का मंगलवार को दिया गया बयान ‘बिगड़ती अर्थव्यवस्था के प्रति भाजपा सरकार उदासीन है। किसानों की आय दोगुना करने की बात दिवास्वप्न है। किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है।’ का बुधवार को जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश की अराजकता से ऊब चुके लोग अब उनकी मानसिकता को समझ चुके हैं। अखिलेश यादव भाजपा के सुशासन, किसानों की खुशहाली से घबरा गये हैं। हमेशा अराजकता की नींव पर खड़ी सपा भला शांति कैसे बर्दाश्त कर सकती है। यही कारण है कि वे हर वक्त कमियों को गिनाते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यूपी में किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती पर जोर देने के साथ ही उनको सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य तेजी से चल रहा है। आज किसान वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ गया है। यूपी में प्रति व्यक्ति आय का बढ़ना भी खुशहाली का दर्शाता है। गांवों में क्रय शक्ति का इजाफा होना भी इसकी ओर किसानों की आय में वृद्धि को दर्शाता है लेकिन लोगों की लाश पर राजनीति करने वाले अखिलेश यादव को यह प्रगति नहीं दिखेगी।
उन्होंने कहा कि खेती किसानी की तस्वीर को चमकाने के बजट 2020 में दमखम के साथ मैदान में उतरी है। कृषि क्षेत्र के संवर्धन और विकास के लिए भाजपा के उद्धोषित 16 मंत्रों जिंदगी में खुशियां लाना, स्मार्ट गांव बनाना, गांव को शहर का रूप देना, रोज-रोज की चुनौतियों से मुक्त करना आदि में किसानों की तस्वीर बदल रही है और आगे ज्यादा बदलेगी। बजट में आधुनिक भारत के सपने को साकार करने के लिए रोबोटिक्स, बायो इनफार्मेटिक्स पर जोर दिया गया है।
फसल बीमा से किसानों में खुशहाली आयी है। बाजार कनेक्टिवीटी बढ़ी है। आज तक सपा व बसपा ने कभी खेतों से निकले उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया था, जिससे किसान की उपज होने पर भी परेशानी और न होने पर भी परेशानी उठानी पड़ती थी। अब ऐसा नहीं है। उत्पाद को लेने के लिए कनेक्टिवीटी पर जोर दिया जा रहा है।






