रामायण-महाभारत के परिवार संदर्भों को जोड़कर अखिलेश ने मीडिया पर साधा निशाना, कहा- ‘परिवारवाद नहीं, बलिदानवाद है’; चैनल ने जवाब में कहा – यह सामान्य डिबेट का हिस्सा था।
नोएडा/लखनऊ, 20 नवंबर 2025: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट के बाद गुरुवार को नोएडा स्थित ‘आज तक’ चैनल के सेक्टर-16ए ऑफिस के बाहर सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चैनल पर यादव परिवार की आलोचना और महाकाव्यों के अपमान का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। भारी हंगामे को देखते हुए पुलिस ने कमांडो सहित भारी बल तैनात कर दिया। लखनऊ में भी सपा मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ता एकत्र हुए और नारेबाजी की।
बता दें कि मामला उस डिबेट शो से शुरू हुआ जिसमें यादव परिवार पर ‘परिवारवाद’ के आरोप लगाए गए थे। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में इसे रामायण-महाभारत के परिवार-आधारित कथानकों से जोड़ते हुए गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा कि मीडिया हाउस “महाकाव्यों का अपमान” कर रहे हैं और “परिवारवाद” के नाम पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं। अखिलेश ने इसे “बलिदानवाद” करार देते हुए कहा कि जो लोग राजनीति को जनसेवा मानते हैं, वे अपने परिवार को संघर्ष के लिए समर्पित करते हैं, जबकि सुविधाभोगी लोग परिवार को व्यापार बनाते हैं।

अखिलेश ने तंज कसते हुए मीडिया को ‘दानाजीवी मीडिया’ बताया।
उन्होंने कहा कि सरनेम का प्रयोग बंद करें।
डॉक्टर, वकील, पत्रकार, कारोबारी के बच्चों को उसी पेशे में आने से रोकने वाला कानून बनाएं।
मीडिया हाउस अपने परिवार के सदस्यों से शेयर और पद वापस लें।
उन्होंने मीडिया पर उपभोक्तावाद बढ़ाने और परिवार तोड़ने का भी आरोप लगाया तथा दिवंगत नेताओं के सम्मान की मांग की। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “अब पीडीए नहीं सहेगा, खुलकर कहेगा!”
चैनल का पक्ष
‘आज तक’ के प्रवक्ता ने बताया कि यह एक सामान्य पॉलिटिकल डिबेट थी जिसमें सभी पक्षों को बुलाया जाता है। उन्होंने कहा, “हम किसी व्यक्ति या परिवार का अपमान नहीं करते। डिबेट में राजनीतिक परिवारवाद पर चर्चा हुई थी, जो लोकतंत्र में स्वाभाविक मुद्दा है। हम हर पक्ष को बराबर स्थान देते हैं।” चैनल ने किसी खास अतिथि या एंकर के बयान को गलत ठहराने से इनकार किया और कहा कि पूरा वीडियो सार्वजनिक है।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
नोएडा में सपा कार्यकर्ता दोपहर से ही चैनल ऑफिस के बाहर जमा होने लगे। नारेबाजी के साथ कुछ कार्यकर्ता गेट तोड़ने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद नोएडा पुलिस ने कमांडो फोर्स तैनात की। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। लखनऊ में भी सपा मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ता एकत्र हुए, लेकिन वहां स्थिति शांतिपूर्ण रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश का यह पोस्ट उत्तर प्रदेश में आगामी निकाय चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और मीडिया के खिलाफ नैरेटिव सेट करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं विपक्षी दल इसे “राजनीतिक अतिसंवेदनशीलता” बता रहे हैं।
फिलहाल मामला थमा नहीं है और सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक तीखी बहस कर रहे हैं।







