- सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, बजट में किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं, कैसे आय होगी दोगुनी
- जुमलों में भटकाने की कला कोई भाजपा से सीखे: अखिलेश
सपने दिखाने और जुमलों में भटकाने की कला कोई भाजपा नेतृत्व से सीखे। किसानों को आय दुगनी करने और फसलों की लागत से डेढ़ गुना मूल्य दिलाने के वादे तो रोज-रोज दुहराए जाते हैं लेकिन हकीकत में अभी तक भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री का कोई वादा पूरा नहीं हुआ है। अभी केन्द्र सरकार का जो बजट पेश हुआ है, उसमें भी किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं प्रस्तुत हुई। यह कोई नहीं बताता कि सन् 2022 तक किसान की दशा में कैसे सुधार आएगा कैसे उसकी आय दुगनी होगी? ये बातें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को कही।
किसान आज भी बिचौलियों की दया पर आश्रित है:
उन्होंने कहा कि वास्तव में भाजपा की नीति और नीयत दोनों में खोट है। उसकी कथनी-करनी में भारी अंतर है। बड़ी-बड़ी बातें किसानों के फायदे की और किया यह कि भारतीय खाद्य निगम के फण्ड में 76 हजार करोड़ की कटौती कर दी। इस कटौती का सीधा असर सरकारी खरीद पर पड़ेगा। किसान आज भी बिचौलियों की दया पर आश्रित है और कल भी उसकी वही हालत रहेगी। कृषि और भूमि सम्बंधी कानूनों में सुधार पर भाजपा सरकार ने मुंह फेर लिया है।
अब कांट्रैक्ट फार्मिंग का राग छेड़ा गया:
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में आकर्षक योजनाओं का दिलचस्प ब्यौरा है। किसान को 16 सूत्रीय फार्मूले का लालच दिया गया है। ‘किसान रेल‘ और ‘कृषि उड़ान‘ का सपना भी दिखा दिया है। नीलीक्रांति और श्वेतक्रांति का नारा भी है। अब भाजपा राज में कांट्रैक्ट फार्मिंग का राग छेड़ा गया है। लेकिन इसमें पानी के संकट से जूझ रहे बुंदेलखण्ड का कोई जिक्र नहीं है कि वहां किसान कैसे अपना खेत सींचेंगे?
उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के समय पहली बार गन्ना का समर्थन मूल्य 40 रुपये कर दिया गया था। किसानों को फसल बीमा, पेंशन की सुविधा दी गई थी। भाजपा राज में किसान के हितों को कारपोरेट घरानों के लिए बलि कर दिया जा रहा है। सीमा और खेत के संतुलन के लिए आवश्यक है कि सरकारों को किसान और जवान के सरोकारों को अपना एजेण्डा बनाना चाहिए।







