लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) से दलित पीएचडी शोधार्थी बसंत कुमार कनौजिया के निष्कासन के विरोध में चल रहा धरना-प्रदर्शन दसवें दिन भी जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर “जातिवादी मानसिकता” और “तानाशाही रवैये” का गंभीर आरोप लगाते हुए छात्र, शोधार्थी और सामाजिक संगठन एकजुट हैं।
आंदोलन को अब व्यापक समर्थन मिल रहा है:
जर्मनी के Ambedkar Collective Göttingen ने इसे “दमनकारी” करार दिया।
पुदुच्चेरी विश्वविद्यालय के शोधार्थी, बापसा, बीएमएस, AUDSU, NSUI, SFI सहित दर्जनों छात्र-सामाजिक संगठन भी खुलकर साथ आए।
विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों (एलुमनाई) ने भी प्रशासन की चुप्पी और एकतरफा कार्रवाई की निंदा की।

राजनीतिक स्तर पर भी मुद्दा गरमा गया है:
बसपा यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने इसे “बिना तथ्य और बिना पक्ष सुने की गई जातिवादी कार्रवाई” बताया और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की।
आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे “संविधानिक मूल्यों और दलित अस्मिता पर हमला” करार दिया।
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने शंबूक-एकलव्य का उदाहरण देते हुए इसे “मनुवादी सोच की ताजा मिसाल” कहा।
प्रमुख मांगें:
- बसंत कुमार कनौजिया का तत्काल पुनर्स्थापन
- विश्वविद्यालय प्रशासन की लिखित माफी
- भेदभावपूर्ण निर्णय लेने वालों पर कार्रवाई
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच
धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डॉ. अम्बेडकर के नाम पर बने इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में दलित-बहुजन छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका स्पष्ट संदेश है- “बसंत को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।” अंतरराष्ट्रीय समर्थन और राजनीतिक दबाव के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक खामोश है।
बीबीएयू में आंदोलन और तेज करने की चुनौती दी
लखनऊ। बसंत कुमार कनौजिया के निष्कासन और उन पर हुए कथित हमले के विरोध में चल रहे धरने को दबाने के लिए प्रशासन ने पत्रकारिता विभाग के छात्र गौरव वर्मा को नोटिस थमा दिया। जवाब में गौरव वर्मा ने दो टूक कहा-“जितनी नोटिस देनी है, दे दो।
बहुजन छात्र अब जाग चुका है, अन्याय के खिलाफ पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि बसंत सर के साथ जो अनैतिक कार्रवाई हुई है, उसका विरोध अंतिम सांस तक जारी रहेगा।”
धरने पर बैठे छात्रों ने चेतावनी दी कि “जब तक आरोपित सुरक्षा सुपरवाइजर पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच नहीं होती, आंदोलन एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।






