बांदा, 2 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के ग्राम घोषण, थाना कमासिन निवासी दो बुजुर्ग, गिरजा शरण यादव (75) और राम सनेही यादव (72), पिछले सात दिनों से अशोक लाट पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। दोनों का आरोप है कि बबेरू विधायक विशंभर यादव के इशारे पर गांव के दबंग उनकी पैतृक जमीन पर मकान निर्माण नहीं करने दे रहे। निर्माण सामग्री और ट्रैक्टर जब्त किए गए, मजदूरों को धमकाया गया, और “तुम्हारे पूरे परिवार को मिटा देंगे” जैसी खुली धमकियां दी जा रही हैं। प्रशासन की उदासीनता और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से त्रस्त होकर ये बुजुर्ग खुले आसमान तले, बारिश में, बिना चिकित्सा सुविधा के अनशन पर हैं।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने 7 जून को थाना कमासिन, सीओ, और एएसपी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया। स्थानीय अधिकारियों की असंवेदनशील टिप्पणियों और प्रशासन की चुप्पी ने दोनों को इस हद तक मजबूर कर दिया कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन पर बैठे हैं।जदयू ने उठाई आवाज, मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापनजनता दल यूनाइटेड (जदयू) महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष पिंकी प्रजापति के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी गईं:
- तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
- बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- मामले की निष्पक्ष जांच हो।
- अतिक्रमणकारियों और धमकी देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मंडलायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे मामले को गंभीरता से लेंगे और उसी दिन संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देंगे। उन्होंने बुजुर्गों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
जदयू की चेतावनी: 48 घंटे में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन:

पिंकी प्रजापति ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “यह सिर्फ दो बुजुर्गों का मामला नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और जनता की अंतिम उम्मीद की लड़ाई है। यदि 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई, तो जदयू जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ तक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।” उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्वयं संज्ञान लेने की अपील की और कहा कि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
समर्थन में उतरे सैकड़ों लोग:
ज्ञापन सौंपने के दौरान जदयू जिलाध्यक्ष उमा कांत सविता, गरिमा सिंह पटेल (जिला अध्यक्ष, समाज सुधार वाहिनी), सद्दाम हुसैन (जिला उपाध्यक्ष, जदयू युवा प्रकोष्ठ), श्रीराम प्रजापति (जिला अध्यक्ष, जदयू दिव्यांग प्रकोष्ठ), बिहारी लाल अनुरागी (जिला महासचिव, जदयू दिव्यांग प्रकोष्ठ), अखिलेश यादव (जिला महासचिव), भुवनेश्वर तिवारी (ब्लॉक अध्यक्ष, महुआ), अरविंद गुप्ता, फूला देवी, रहमत अली, समाजसेवी सुरेश कुशवाहा, गीता देवी, विनोद पटेल, सुशीला, साधना सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।
जनता में आक्रोश, प्रशासन पर सवालस्थानीय लोगों में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और उग्र हो सकता है। बुजुर्गों की नाजुक हालत को देखते हुए तत्काल चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मालूम हो कि बबेरू विधायक के कथित दबाव और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ दो बुजुर्गों का यह अनशन न केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई है, बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल उठाता है। मंडलायुक्त के आश्वासन के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या बुजुर्गों को न्याय मिलेगा, या यह मामला और गंभीर रूप लेगा? अगले 48 घंटे निर्णायक होंगे।







