पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ निरन्तर गतिशील रहने का संदेश देती है: राष्ट्रपति

0
571
.राज्यपाल की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का हुआ विमोचन
.निरन्तर कर्म करते रहने से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है: श्री नाईक
लखनऊ, 27 मार्च। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के संस्कृत संस्करण का कल सोमवार को वाराणसी के दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल में राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में विमोचन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुस्तक की प्रथम प्रति राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द को भेंट की।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में समन्वय सेवा ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष स्वामी अवधेशानन्द गिरि, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री श्री मनसुख भाई मंडाविया, प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री चेतन चैहान, सूचना राज्यमंत्री डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी, सांसद एवं उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डाॅ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष श्री बल्देव भाई शर्मा सहित बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे। राज्यपाल की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का संस्कृत अनुवाद सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेन्द्र मिश्र द्वारा तथा प्रकाशन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा किया गया है। पुस्तक की प्रस्तावना वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य डाॅ. कर्ण सिंह द्वारा लिखी गयी है।

श्री नाईक ने इस अवसर पर अपने संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 80 वर्ष से अधिक पुराने मराठी दैनिक समाचार पत्र सकाल ने महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं केन्द्रीय मंत्रियों श्री शरद पवार, श्री सुशील कुमार शिंदे एवं श्री मनोहर जोशी के साथ उनसे अनुरोध किया कि अपने-अपने संस्मरण लिखें जो उनके समाचार पत्र के रविवारीय अंक में विशेष रूप से प्रकाशित होंगे। इस प्रकार एक वर्ष तक सीरीज चली। मित्रों एवं शुभचिंतकों के आग्रह पर समाचार पत्र में प्रकाशित लेखों को पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के रूप में मराठी भाषा में प्रकाशित किया गया। मराठी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ अब तक हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू एवं गुजराती भाषा में अनुवादित होकर प्रकाशित हुई हैं। संस्कृत विद्वान एवं प्रेमियों के आग्रह पर अब संस्कृत में पुस्तक प्रकाशित हुई है।

राज्यपाल ने श्लोक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ की व्याख्या करते हुए कहा कि निरन्तर कर्म करते रहने से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है। राज्यपाल ने अपने राजनैतिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्हें संसद में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन, सांसद निधि की शुरूआत कराने, मुंबई को उसका असली नाम दिलाने, मुंबई में दो तल के शौचालय बनवाने एवं महिलाओं के लिए किये गये कार्यों से बहुत समाधान है। उन्होंने 1994 में अपने कैंसर रोग से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए अपने जीवन में पत्नी एवं पुत्रियों के सहयोग का विशेष उल्लेख किया। राज्यपाल ने पुस्तक का विमोचन वाराणसी में करने के विषय में बताया कि वे मुंबई में निवास करते है और वाराणसी का मुंबई से पुराना रिश्ता है। वाराणसी के विद्धान गागा भट्ट ने शिवाजी का राज्याभिषेक किया था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए एमओयू दोनों राज्यों के बीच शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं व्यवसायिक संबंधों को सुदृढ़ करेंगे।

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द ने विमोचन समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री नाईक की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ निरन्तर गतिशील रहने का संदेश देती है। श्री नाईक से पुराना संबंध है। उनकी आत्मीयता, नेतृत्व क्षमता, कार्य कुशलता एक विशेष छाप छोड़ती हैं। श्री नाईक ने कुष्ठ पीड़ितों, मछुआरों और महिलाओं के लिए बहुत कार्य किया है। मुंबई में पहली महिला टेªन का शुभारम्भ श्री नाईक द्वारा किया गया। वे सफलता और असफलता से प्रभावित हुए बिना निरन्तर कार्य करते हैं। कर्म की महत्ता के श्लोक को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि श्री नाईक कर्म करते हुए फल की इच्छा नहीं रखते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ समाज के सभी वर्गों विशेषकर सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वालों के लिए प्रेरणादायी होगी।

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को बधाई देतेे हुए कहा कि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है और उसके सबसे नजदीक जर्मन भाषा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि राज्यपाल की पुस्तक का जर्मन संस्करण शीघ्र ही आने वाला है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की विशिष्ट कार्यशैली है। उत्तर प्रदेश को उनका सानिध्य प्राप्त है। ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ और लखनऊ में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ उद्घोष के 101 वर्ष पूर्ण होने के आयोजन में राज्यपाल प्रेरक रहे हैं। राज्यपाल शासन-प्रशासन को सुझाव देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ राज्यपाल के जीवन के आदर्श मूल्यों का संस्मरण है।

स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने पुस्तक विमोचन के अवसर पर कहा कि श्री नाईक की आत्मकथा में परमार्थ, पारिवारिक संवेदना का राष्ट्र उपासक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि श्री नाईक का जीवन सरलता और सहजता का समावेश है तथा उन्होंने जीवन के यथार्थ को छुआ है। श्री नाईक ने जीवन में सकारात्मक सोच के साथ विपक्षियों का भी सदैव सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि श्री नाईक ने अपनी आत्मकथा में सब कुछ राष्ट्र के लिए अर्पित किया है।

ज्ञातव्य है कि राज्यपाल श्री राम नाईक के मराठी भाषी संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!‘ का विमोचन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा 25 अपै्रल, 2016 को मुंबई में किया गया था। राज्यपाल की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू तथा गुजराती संस्करणों का लोकार्पण 9 नवम्बर 2016 को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में, 11 नवम्बर 2016 को लखनऊ के राजभवन में तथा 13 नवम्बर 2016 को मुंबई में हुआ। शीघ्र ही राज्यपाल के संस्मरण संग्रह का बंगाली, सिंधी, तमिल सहित अरबी एवं फारसी भाषा में भी प्रकाशन किए जाने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
पुस्तक विमोचन समारोह से पूर्व आज सुबह राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द का वाराणसी एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा शुरू की जा रही परियोजना के शुभारम्भ कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य विशिष्टजनों के साथ राज्यपाल ने सहभाग किया तथा अपने विचार व्यक्त किये।

पढ़े इससे सम्बंधित खबर:

संस्कृत में सार्थक हुई चरैवेति चरैवेति

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here