नई दिल्ली16 दिसम्बर। आतंकवाद का दंश झेल चुके किश्तवाड़ को फिर उसी राह पर धकेलने की साजिशों को नाकाम करने के लिए सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। वह युवाओं को एक बेहतर भविष्य की राह दिखाने में जुट गई है। किश्तवाड़ की भौगोलिक विवशताओं और पिछड़ेपन का दुश्मनों ने भरपूर लाभ उठाया है। उन्होंने शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अब विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए सेना ने पुख्ता तैयारी कर ली है। उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए ऑनलाइन कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही हैं। इसका पहला बैच शुक्रवार से शुरू हो रहा है।
करीब 250 छात्र-छात्राओं ने इसके लिए पंजीकरण कराया है। इनमें पूर्व आतंकियों और आतंकवाद प्रभावित परिवारों के बच्चे भी शामिल हैं। बता दें कि बर्फबारी के कारण जिले के स्कूलों में इन दिनों छुट्टियां हैं। सेना ने छुट्टियों में ऑपरेशन सद्भावना के तहत सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल किश्तवाड़ में 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग देने की व्यवस्था की है। इसके लिए बेंगलुरु की एक कंपनी से समझौता किया गया है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाएगी। ऑनलाइन क्लासेस में विज्ञान, गणित सहित अन्य विषयों के अलावा इंजीनियरिंग और सिविल सर्विस के विषयों की तैयारी कराई जाएगी। ऑनलाइन कक्षाओं में कंप्यूटर व प्रोजेक्टर का प्रयोग होगा। कक्षाएं प्रतिदिन चार घंटे की होंगी। बीच में रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी होगी।
उत्साहित हैं युवा
पंजीकरण कराने वाले छात्र-छात्राओं में शामिल प्रदीप सेन, रोहित परिहार, आशा देवी, मुदस्सर हुसैन, आयशा ने कहा कि वे इसे लेकर खासे उत्साहित हैं। पंजीकरण के लिए सेना ने कुछ समय पहले विज्ञापन जारी किए थे। स्कूलों में भी सूचना दी गई थी। इसका अच्छा रिस्पांस रहा। बच्चे कहते हैं कि यह उनके लिए बहुत अच्छा मौका है, क्योंकि बर्फबारी के कारण स्कूल और जिले से बाहर जाने के रास्ते बंद हैं। ऐसे में इस समय का इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता था।
हम इनके भविष्य को संवारेंगे। वहीं, सेना के अधिकारियों ने कहा कि वे हर वर्ष सर्दी की छुट्टियों में दूरदराज के स्कूलों के बच्चों को स्थानीय शिक्षकों की मदद से ट्यूशन दिलाते रहे हैं। लेकिन इस साल यह फैसला किया है कि किसी अच्छी कंपनी के सहयोग से बच्चों को आधुनिक तरीके से ऑनलाइन कोचिंग करवाई जाए। पहले इस इलाके में इंटरनेट की सेवा अच्छी नहीं थी, लेकिन अब स्पीड बेहतर है। यहां के युवाओं का रुझान सेना, इंजीनियरिंग और सिविल सर्विस में है। हम इनके भविष्य को संवारेंगे।
18 साल आतंकवाद झेल चुका किश्तवाड
इस जिले में 1990 से लेकर 2008 तक आतंकवाद चरम पर था। यहां कई नरसंहार भी हुए। सेना के ऑपरेशन के बाद ही इस जिले को आतंकवाद से मुक्ति मिली है, लेकिन अब भी चोरी छिपे आतंकवाद को सुलगाने के प्रयास चल रहे हैं। अत: सेना अलर्ट है। वह स्वास्थ्य शिविरों, खेल प्रतियोगिताओं, सेना में भर्ती कार्यक्रमों, भारत भ्रमण जैसी योजनाओं के जरिये युवाओं को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।







