नई दिल्ली, 21 जनवरी। केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा पेट्रोल एवं डीजल से भारी टैक्स वसूलने के कारण पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछले साल 16 जून से लागू की गई डेली डायनामिक प्राइसिंग की नई व्यवस्था के बाद केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा लगातार अपनी कमाई बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है। पिछले 3 सालों में डीजल पर 380 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है।
डीजल पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म, पेट्रोल 5 रुपये लीटर महंगा
वहीं डीजल पर मिलने वाली सब्सिडी भी खत्म कर दी गई है। इसके साथ ही पिछले 3 वर्षों में पेट्रोल पर 120 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी और टैक्स बढ़ाए गए हैं। नियमित रूप से डीजल एवं पेट्रोल की कीमतें परिवर्तित हो रही है। पिछले 2 माह के अंदर पेट्रोल 5 रुपये लीटर महंगा हो गया है। केंद्र सरकार ने 3 साल में पेट्रोल और डीजल की ड्यूटी में 11 बार परिवर्तन किया है।
गुजरात चुनाव के पूर्व केंद्र सरकार की अपील पर कुछ राज्यों ने अपना वेट टैक्स घटाया था। किंतु इसके बाद भी लगातार डीजल एवं पेट्रोल के दामों में वृद्धि होती ही जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने 3 माह पहले वैट घटाया था। किंतु हाल ही में 50 पैसे प्रति लीटर का सेस लगा दिया है। सरकार वेट घटाने का दावा जरूर करती है। किंतु पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से अब उपभोक्ताओं के बीच गुस्सा बढ़ने लगा है।
सरकार की कथनी और करनी का अंतर अब उपभोक्ताओं पर सीधा असर कर रहा है। कृषि कार्य, में डीजल का सर्वाधिक प्रयोग होता है। जिसके कारण कृषि उत्पाद के उपकरणों का लागत मूल्य बढ़ रहा है। वहीं मध्यम एवं निम्न वर्गीय परिवारों में परिवहन के रूप में दो पहिया वाहन उपयोग में लगाये जा रहे हैं। पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी का गुस्सा बढ़ता ही जा रही है।







