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    Home»उत्तर प्रदेश

    राज्य की 22 करोड़ जनता का विकास, सीधे तौर पर गांवों के विकास से जुड़ा है: मुख्यमंत्री

    By June 29, 2017 उत्तर प्रदेश No Comments9 Mins Read
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    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना के अन्तर्गत अधिक से अधिक ऋण वितरित किए जाएं
     
    मुख्यमंत्री ने सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को सम्बोधित किया
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि राज्य की 22 करोड़ जनता का विकास, सीधे तौर पर गांवों के विकास से जुड़ा है। राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु अवस्थापना सुविधाओं के विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर सृजित करने, और ग्रामीण जनता के लिये कल्याणकारी कार्यक्रम चलाये जाने के लिए बैंकों का सहयोग आवष्यक है, जिससे किसान, गांव व गरीब की आर्थिक व सामाजिक स्थिति में सुधार आये।
    मुख्यमंत्री जी आज यहां योजना भवन में सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एस0एल0बी0सी0) की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने ‘वार्षिक ऋण योजना 2017-18’ तथा ‘उत्तर प्रदेश गवर्नमेन्ट क्राॅप लोन रिडम्प्शन स्कीम फाॅर अपलिफ्टमेन्ट एण्ड सस्टनेबल डेवलपमेन्ट आॅफ स्माॅल एण्ड मार्जिनल फार्मर्स’ पुस्तिका का विमोचन भी किया।
    योगी जी ने कहा कि प्रदेश की लगभग 78 फीसदी जनसंख्या गांवों में निवास करती है और अपनी आजीविका के लिए अधिकांषतः कृषि पर निर्भर है। प्रदेश में किसानों की कुल संख्या का लगभग 93 फीसदी लघु एवं सीमान्त कृषक हैं। स्पष्ट है कि प्रदेष की अर्थव्यवस्था काफी हद तक लघु एवं सीमान्त कृषकों पर निर्भर है। विगत वर्षों में दैविक आपदाओं-सूखा, बाढ़ तथा ओलावृष्टि का सर्वाधिक कुठाराघात इन कृषकों को ही झेलना पड़ा है, जिसके कारण ये कृषक बैंकों से लिये गये फसली ऋण की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में उनके सूदखोरों एवं साहूकारो के मकड़जाल में फसने की प्रबल सम्भावनायें हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका सीधा प्रभाव कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर पड़ना निष्चित है, जो प्रदेष के विकास की गति को सीधे तौर पर अवरूद्ध करेगा। प्रदेश के लघु एवं सीमान्त कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुधारने एवं उन्हे पुनः मुख्य धारा में वापस लाने के लिए, राज्य सरकार द्वारा उनके एक लाख रुपये तक के फसली ऋण को माफ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इसके अलावा, किसानों के एनपीए ऋणों को एकमुष्त समाधान (ओटीएस) के तहत राज्य सरकार की वित्तीय सहायता से ‘राइट आॅफ’ किये जाने का निर्णय भी लिया। ताकि ऐसे कृषक पुनः बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकें जिन्हें ऋणग्रस्तता के चलते बैंकों ने फसली ऋण देना बंद कर दिया था।
    योगी जी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बैंकों के सहयोग के चलते फसल ऋण माफी योजना को मूर्त रूप दिया जा सका है, किन्तु यह कार्य तभी पूर्ण होगा जब प्रदेश के प्रत्येक पात्र लघु व सीमान्त किसानों के खाते में राज्य सरकार द्वारा दी गयी राहत को पहुंचा दिया जाए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों को ऋण अदायगी के लिए न तो कोई नोटिस जारी करें और न ही उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई करें। फसली ऋण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बैंकों के साथ-साथ जिला मषीनरी को भी जोड़ा गया है। इसके लिए जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी है। जिलाधिकारी सुनिष्चित करेंगे कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहंुचे और योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए।
    मुख्यमत्री ने कहा कि योजना में पारदर्षिता सुनिष्चित करने के लिए लाभान्वित होने वाले किसानों के बैंक खातों को आधार से लिंक कराया जाय। बैंकर्स जिला प्रषासन से आवष्यक समन्वय करते हुए आवष्यकतानुसार किसानों की केवाईसी औपचारिकतायें भी पूर्ण कराए। राज्य सरकार का वर्ष 2017-18 का बजट पारित होने के तत्काल बाद लघु एवं सीमान्त किसानों की फसल ऋण माफी की समतुल्य धनराषि, बैंकों को उपलब्ध करा दी जाएगी। इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों को ऋण माफी संबंधी प्रमाण-पत्र शिविर लगाकर उपलब्ध करायें जायें।
    योगी जी ने कहा कि प्रदेश में जिस संख्या में बैंक की शाखाएं होनी चाहिए थी, वह नहीं हैं। वर्तमान में यहां 16,583 बैंक शाखाएं हैं, जिनमें 8,176 ग्रामीण शाखाएं हैं। प्रदेश में प्रति बैंक शाखा जनसंख्या का औसत लगभग 12,000 है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह औसत लगभग 9,000 है। इसी प्रकार प्रदेष के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति बैंक शाखा जनसंख्या का औसत लगभग 21,000 है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह औसत लगभग 17,400 है। इस प्रकार अखिल भारत की तुलना में उत्तर प्रदेष के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखायें अपर्याप्त हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने एवं प्रदेष के अन्तिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को दृष्टिगत रखते हुए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक बैंक शाखायें स्थापित करना जरूरी है। उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देष के अनुरूप आने वाले समय में उत्तर प्रदेष में अधिक से अधिक ‘बैंकिंग आउटलेट’ खोले जाएं, ताकि लोगों को आसानी से बैंकिंग सेवायें/सुविधायें मिल सकें। इस संकल्प की पूर्ति के लिये राज्य सरकार बैंकों को यथा सम्भव हर सुविधा उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बैंकों एवं बैंकर्स की सुरक्षा हेतु भी संवेदनषील है।
    योगी जी ने कहा कि प्रदेश की अधिकांष आबादी आर्थिक रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों के कल्याण एवं उनकी आर्थिक समृृद्धि के लिए कृत संकल्पित है, इसलिए कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और सहकारिता को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना करने का काम शुरू किया गया है। यह लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकेगा जब कृषि उत्पादन में वृद्धि हो। इसके लिए किसानों को नयी तकनीक से जोड़ने, कृषि में निवेष के साथ-साथ वैज्ञानिक विधियों को बढ़ाने की दिषा में प्रभावी प्रयास किए जाए।
    प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण तथा अन्य प्रकार के मूल्य संवर्धन कार्य-कलापों को बढ़ाने एवं मण्डियों को आॅनलाइन जोड़ने पर भी बल दे रही है। उत्तर प्रदेष देष का सबसे बड़़ा राज्य होने के बावजूद विकास के इन्डेक्स में पिछड़ा माना जाता है। वर्तमान सरकार ने प्रदेष में परिवर्तन, विकास और गरीबों के सषक्तीकरण का कार्य प्रारम्भ किया है। उपलब्ध संसाधनों को तेजी से बढ़ाते हुए प्रदेष की विकास दर को 10 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, क्योंकि ऐसा होने पर ही राज्य के विकास के लिए आवष्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। इसके लिए कृषि जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र के साथ-साथ उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए म्ंेम व िकवपदह इनेपदमेे जैसे कदम उठाये जा रहे हैं। प्रदेष की विकास दर को बढ़ाने हेतु उद्योगों को प्रोत्साहन देने की तत्काल आवष्यकता है, ताकि प्रदेष में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ प्रदेष की आर्थिक स्थिति में भी तेजी से सुधार परिलक्षित हो।
    योगी जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूंजी निवेष और उद्योग स्थापना की विषाल सम्भावनायें हैं। यह सरकार पूंजी निवेष और उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ उद्योगों, उद्यमियों की समस्याओं के समाधान एवं उनके कार्य विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने नयी औद्योगिक नीति लागू करेगी। प्रदेष में बैंकों के योगदान की समीक्षा से स्पष्ट है कि बैंकों के ऋण-जमानुपात में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मार्च, 2017 तक लगभग 9 फीसदी की गिरावट आयी है। उत्तर प्रदेष के 18 जनपद ऐसे है जिनका ऋण-जमानुपात 40 प्रतिशत से भी कम है जो अधिकाषंतः पूर्वांचल से संबंधित हैं। जनपद सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, जौनपुर एवं गाजीपुर का ऋण जमानुपात 25 प्रतिशत से भी कम है। इससे प्रदेष के विकास में क्षेत्रीय असमानता स्पष्ट दिखायी देती है। उन्हांेने कहा कि पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए एक सुदृढ़ कार्ययोजना बना कर इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक ऋण वितरित किए जाएं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना के अन्तर्गत भी अपेक्षित ऋण वितरण नहीं किया गया है। प्रदेश में बैंकों की शाखाओं के दृष्टिगत स्टैण्ड-अप इण्डिया योजना के अन्तर्गत यदि एक अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थी एवं एक महिला लाभार्थी को ऋण दिया जाय तो, प्रतिवर्ष 33,000 नये उद्यमी प्रदेश के आर्थिक पटल पर तैयार होंगें, जो प्रदेश के सार्थक विकास में अहम् भूमिका का निर्वाह करेंगे। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत बैंकों ने उत्तर प्रदेश में 15 जून, 2017 तक 3 लाख लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत किये है। इस प्रकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में भी बैंकों ने उत्तर प्रदेश की बड़ी जनसंख्या के बावजूद कम ऋण वितरण किया है। उन्होंने बैंकों से इन दोनों योजनाओं के अन्तर्गत लाभार्थियों की आवष्यकताओं के अनुरूप अधिक से अधिक ऋण वितरण करने की अपेक्षा की।
    योगी जी ने कहा कि राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में उद्यमषीलता को भी प्रोत्साहन देने पर भी बल दे रही है। उद्योगों की आवष्यकता के अनुरूप सभी जनपद मुख्यालयों को 24 घण्टे, तहसील मुख्यालयों को 20 घण्टे तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घण्टे की विद्युत आपूर्ति प्रारम्भ कर दी गयी है। प्रत्येक इच्छुक परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौषल विकास प्रषिक्षण प्रदान करने की दिशा मंे काम किया जा रहा है। इसी प्रकार ग्रामीण स्वरोजगार प्रषिक्षण संस्थानों (आर-सेटी) के माध्यम से भी स्वरोजगार हेतु प्रषिक्षण दिया जा रहा है। कौषल विकास मिषन एवं आर-सेटी के माध्यम से प्रषिक्षण प्राप्त एवं स्वरोजगार के इच्छुक व्यक्तियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत ऋण प्रदान करने में बैंकों द्वारा वरीयता दी जानी चाहिए।
    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी अभी तक प्रदेष में संतोषजनक कार्य नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत इस वर्ष 10 लाख परिवारों को आवास दिये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों के लिए ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास’’ मिशन के अन्तर्गत क्रियान्वित की जा रही है। इसके अन्तर्गत पात्र शहरी गरीबों द्वारा आवास के अधिग्रहण/निर्माण के लिए, लिए गए गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी दिये जाने की व्यवस्था है । उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि केन्द्र/राज्य सरकार के सबके लिये आवास मिशन को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर ऋण वितरण करें।
    प्रदेश के वित्त मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए वर्तमान राज्य सरकार द्वारा गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इस कार्य में बैंकों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि उन्हें राज्य के विकास में बढ़-चढ़ कर अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
    कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अनूप चन्द्र पाण्डेय, आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक श्री अजय कुमार, बैंक आॅफ बड़ौदा के प्रबन्ध निदेशक श्री पी0एस0 जयकुमार ने भी सम्बोधित किया।

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