लखनऊ। सीपीआई (एमएल) के नेता आर. मानसय्या ने कहा कि भारत में जाति और वर्ग अलग नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि देश की पूंजी का संचय कुल-व्यवसाय, बेगार और बंधुआ मजदूरी के शोषण से हुआ है, जिसके कारण आज 40% संपत्ति सिर्फ 1% सवर्ण-उच्च वर्ग के पास केंद्रित है।
आरक्षण गरीबी उन्मूलन नहीं, जाति उन्मूलन का हथियार
मानसय्या ने स्पष्ट किया कि आरक्षण जाति व्यवस्था खत्म करने के लिए लाया गया था, न कि गरीबी हटाने के लिए। गरीबी उन्मूलन के लिए क्रांति जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज भी 99% दलित गरीबी और संपत्ति से वंचित हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे जातिगत भेदभाव का शिकार होते हैं।
आर्थिक आरक्षण की साजिश का विरोध
नेता ने जोर देकर कहा कि जब तक देश की संपत्ति को जातिवार जनसंख्या अनुपात में बांटने वाली आर्थिक नीति लागू नहीं होती और जाति पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती, तब तक जाति आधारित आरक्षण दलितों व कमजोर वर्गों का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसे सामाजिक आरक्षण कहते हैं।
आर. मानसय्या ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि “जब तक जाति है, तब तक जाति आधारित आरक्षण चाहिए।” उन्होंने जातिवादियों द्वारा “आर्थिक आरक्षण” के नाम पर आरक्षण छीनने की साजिश का पुरजोर विरोध किया।
बता दें कि यह बयान सामाजिक न्याय और आरक्षण की बहस को फिर से केंद्र में लाता है।







