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    Home»इंडिया

    अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस: भारतीय सेना की सुपर वुमेन पावर को सलाम!

    By March 8, 2018 इंडिया No Comments11 Mins Read
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    पूनम नेगी

    8 मार्च यानी महिला सशक्तिकरण दिवस। इक्कीसवीं सदी के अत्याधुनिक युग में तमाम सामाजिक बदलावों के साथ एक बड़ा बदलाव भारतीय नारी की सामाजिक स्थिति में भी आया है। इक्कीसवीं सदी की प्रगतिशील विचारों वाली भारतीय नारी को यदि “सुपर वुमेन” कहा जाए तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी। एक समय था जब भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी लेकिन इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अपने आप में एक मिसाल कही जा सकती है। अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर आइए आपको रूबरू कराते हैं भारतीय सेना की ऐसी कुछ बेमिसाल शख्सियतों से जो देशवासियों के लिए गौरव का विषय तथा आधी आबादी के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं-

    1. सागर परिक्रमा पर निकली नौसेना की जांबाज टोली

    समंदर के रास्ते पूरी दुनिया की सैर करने का मिशन यानी 21600 नॉटिकल मील से ज्यादा की यात्रा; वह भी महज 55 फुट की एक छोटी सी नाव में सिर्फ हवाओं के भरोसे। ऐसे कठिन सफर की कल्पना ही रोमांचित कर देती है। लेकिन भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में इस साहसिक अभियान पर निकला छह महिला ऑफिसर्स का देश की नारी शक्ति के हौसलों को सलाम करता है।  सितंबर 2017 के पहले हफ्ते में “आइएनएस तारिणी” नामक नौका से आठ महीनों की सागर यात्रा पर निकलने से पूर्व इस दल की छह साहसी महिला ऑफिसर्स ने पीएम नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की थी। यह मिशन एशिया में महिलाओं द्वारा समुद्री मार्ग से धरती का चक्कर लगाने का पहला प्रयास है। इस टीम में कमांडर वर्तिका जोशी के साथ लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, पी स्वाती, लेफ्टिनेंट एस. विजया देवी, बी ऐश्वर्या और पायल गुप्ता शामिल हैं। कमांडर वर्तिका के मुताबिक बीते साल सितम्बर में गोवा से शुरू हुआ आइएनएस तारिणी के साथ उनकी टीम का यह सफर गोवा में ही समाप्त होगा। इस साहसी युवा टीम की इस समुद्री यात्रा के चार पड़ाव होंगे- फ्रीमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लिटलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनले (फॉकलैंड) और केप टाउन (साउथ अफ्रीका)। खास बात यह है कि इस मिशन में दल के किसी भी सदस्य के पास कोई अस्त्र शस्त्र नहीं है, इनका हौसला और ट्रेनिंग ही उनका एकमात्र हथियार है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह दल अपना अभियान पूरा करके अप्रैल 2018 तक देश वापस लौट आएगा।

    Image result for देश में पहली बार तीन महिलाएं वायुसेना के लड़ाकू विमानों की पायलट बनी हैं। अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह।

    1. वायुसेना की फाइटर पायलट तिकड़ी

    देश में पहली बार तीन महिलाएं वायुसेना के लड़ाकू विमानों की पायलट बनी हैं। अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह। ये तीनों देश की पहली महिलाएं हैं, जिन्हें वायुसेना के लड़ाकू विमानों के पायलट के तौर पर कमीशन दिया गया। अवनि मध्य प्रदेश के रीवा से हैं। उनके पिता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और भाई आर्मी में हैं। भावना बिहार के बेगूसराय की रहने वाली हैं। मोहना गुजरात के वडोदरा की हैं जिनके पिता एयरफोर्स में वारंट अफसर हैं।
      गौरतलब हो कि इंडियन एयर फोर्स की अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। अवनी ने अकेले मिग-21 उड़ाकर भारत के आसमान में एक नया इतिहास रच दिया है। 19 फरवरी को अवनी चतुर्वेदी ने गुजरात के जामनगर एयरबेस से अकेले ही फाइटर एयरक्राफ्ट मिग-21 से उड़ान भरी।
    1. एडमिरल निर्मला कंनन

    भारतीय नौसेना में रेयर एडमिरल रैंक हासिल करने वाली निर्मला कंनन नेवी की पहली टू स्टार फीमेल अफसर हैं। गौरतलब हो कि रीयर एडमिरल रैंक हासिल करने वाली सुश्री निर्मला कंनन इंडियन आर्मी और भारतीय वायुसेना में भी लम्बे समय तक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। साल 2011 में उन्हें साउथ कमांड में मेडिकल अफसर बनाया गया। जानना दिलचस्प होगा कि महिला रोग विशेषज्ञ रहीं सुश्री कंनन भारतीय विदेश सेवा अधिकारी निरुपमा राव की बहन हैं और उनका पूरा परिवार इंडियन आर्मी से जुड़ा हुआ है।
    1. इंटेलीजेंस ऑफिसर गेनेवी लालजी

    पहली बार इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट गेनेवी लालजी को सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमाडिंग इन चीफ की एडीसी बनाया गया है। गेनेवी लालजी भारत की पहली यंग इंटेलीजेंस ऑफिसर यानी महिला खुफिया लेफ्टिनेंट हैं। भारतीय इतिहास में पहली बार खुफिया अधिकारी लेफ्टिनेंट के पद के लिए किसी महिला अधिकारी को चुना जाना एक बेहद गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह महत्वपूर्ण पद हासिल कर गेनेवी लालजी ने भारतीय सेना में इतिहास रच दिया है। बताते चलें कि सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट गेनेवी लालजी को साल 2011 में कोर ऑफ मिलिट्री इंटेलीजेंस में कमीशन दिया गया था और उन्होंने पुणे में युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान कई उपलब्धियां हासिल की थीं।
    1. मेजर मिताली मधुमिता

    मेजर मिताली मधुमिता भारतीय सेना में अपनी बहादुरी और विशिष्ट सेवा के लिए गैलेंट्री अवार्ड जीतने वालीं पहली महिला हैं। गौरतलब हो कि वर्ष 2010 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास के कर्मियों पर आतंकवादी हमले के दौरान साहस का परिचय दिया था और गंभीर रूप से घायल लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभायी थी। मेजर मिताली भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं जिनको सैन्य स्टेशन पर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये भारतीय सेना ने सेना मेडल (शौर्य पदक) से सम्मानित किया है।
    1. लेफ्टिनेंट अंजना मोहन

    लेफ्टिनेंट अंजना मोहन पहली महिला कैडेट हैं जिन्हें गोल्ड मेडल और स्वार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया है। बताते चलें कि लेफ्टिनेंट अंजना मोहन भरतनाट्यम डांसर के साथ एक अधिवक्ता भी रही हैं। क्लासिकल डांसर के बाद वकील और फिर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, मात्र 25 साल की अंजना मोहन का यह बहुआयामी व्यक्तित्व वाकई प्रशंसनीय है। मुंबई की रहने वाली लेफ्टिनेंट अंजना मोहन पहली महिला है जिन्होंने भारतीय सेना की ऑफिसर ट्रेनिंग कमीशन से शॉर्ट सर्विस कमीशन 99 और शॉर्ट सर्विस कमीशन (महिला) 13 में गोल्ड मेडल के साथ स्वॉर्ड ऑफ ऑनर का सम्मान भी प्राप्त किया है।
    1. लेफ्टिनेंट रुचि वर्मा

    30 अप्रैल 2013 तक रुचि वर्मा की बस इतनी ही पहचान थी कि वह सेना में मेजर विनीत वर्मा की पत्नी थीं। उस वक्त वह काम के नाम पर बच्चे संभालतीं, खाना बनातीं और पार्टी अटैंड करतीं थीं लेकिन 30 अप्रैल 2013 को एक भयानक हादसे ने अचानक उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी। असम में एक उग्रवाद विरोधी अभियान में पति मेजर विनीत की शहादत ने समूची जिंदगी बदरंग कर दी। मगर रुचि ने जीवन से हार नहीं मानी और पति के जाने के पांच महीने बाद ही रुचि ने फौज में अफसर बनने के लिये फार्म भर दिया। अफसर बनने के लिये जरूरी एसएसबी परीक्षा पासकर रुचि आज वह वर्मा से लेफ्टिनेंट रुचि वर्मा बन चुकी हैं और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना का हिस्सा हैं।
    1. लेफ्टिनेंट स्वाति महादिक और निधि दुबे

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 36वें रेडियो पर मन की बात में दो वीर महिलाओं का जिक्र किया था जिनके पति देश के लिए आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गये। बावजूद इसके उन वीरांगनाओं ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि पति के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर शामिल हुईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना को लेफ्टिनेंट स्वाति और निधि के रूप में दो असामान्य वीरांगनाएं मिली हैं। असामान्य इसलिए हैं कि उनके पति मां भारती की सेवा करते-करते शहीद हो गये। हम कल्पना कर सकते हैं कि इस छोटी आयु में जब संसार उजड़ जाये तो मन:स्थिति कैसे होगी? लेकिन शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक ने इस कठिन परिस्थितियों का मुक़ाबला करते हुए आगे बढ़ने की ठानी और अपने पति के सपनों को पूरा करने के लिए वह भारतीय सेना में भर्ती हुईं। उन्होंने 11 महीने तक कड़ी मेहनत करके प्रशिक्षण हासिल किया और आज लेफ्टिनेंट स्वाति महादिक देश सेवा में समर्पित हैं। इसी तरह भारतीय सेना की दूसरी  जांबाज सदस्या हैं लेफ्टिनेंट निधि दुबे। उनके पति मुकेश दुबे सेना में नायक के पद पर तैनात थे जो मातृ-भूमि के लिए शहीद हो गये। उनकी पत्नी निधि ने ने भी मन में देश सेवा करने की ठानी और वे भी सेना में भर्ती हो गयी। हर देशवासी को हमारी इस मातृ-शक्ति पर पर गर्व होना चाहिए।
    1. कैप्टन प्रिया सेमवाल

    आतंकियों से लड़ते हुए पति नायक अमित शर्मा शहीद हो गये थे। पति के शहीद होने पर प्रिया सेमवाल टूट चुकी थीं लेकिन उन्होंने पति के सम्मान के लिए ही आर्मी में जाने का फैसला लिया। गौरतलब हो कि सेना में भर्ती होने वाली पहली महिला ऑफिसर कैप्टन प्रिया सेमवाल को “वीर नारी सम्मान” से नवाजा जा चुका है। उन्हें यह सम्मान वॉर विडो एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दिया गया है। बताते चलें कि 20 जून 2012 को अरुणाचल में सेना के ऑपरेशन ऑर्किड में देहरादून निवासी 14 राजपूत रेजीमेंट के नायक अमित सेमवाल शहीद हो गये। उनकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। प्रिया के लिए यह वक्त इसलिए भी अधिक चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उनके ऊपर एक छोटी बेटी ख्वाहिश की भी जिम्मेदारी थी। बावजूद इसके प्रिया ने सेना में जाने का कठोर फैसला लिया। देहरादून के गांव धोरण निवासी प्रिया के परिवार और गढ़ी कैंट स्थित ससुराल पक्ष के लिए प्रिया का यह फैसला बहुत अटपटा था लेकिन बाद में उन्होंने इसका समर्थन किया। 15 मार्च 2014 को प्रिया ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई से बतौर लेफ्टिनेंट पास आउट हुईं और आज प्रिया के नाम के आगे कैप्टन रैंक भी जुड़ चुका है।
    1. लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी

    लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी एक मल्टीनेशन एक्सरसाइज में भारत का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। एक्सरसाईज फोर्स-18, भारत द्वारा आयोजिस सबसे बड़ा युद्धाभ्यास होता है। इसमें हिस्सा लेने वाले 18 दलों में नेतृत्व करने वाली वह एकमात्र महिला अधिकारी हैं। गुजरात की रहने वालो सोफिया बायोकेमिस्ट्री से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वर्तमान में देश की सेवा कर रही सोफिया भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के अंतर्गत 1999 में शामिल हुईं थी। उस दौरान उनकी उम्र महज 17 साल की थी। सोफिया सेना के सिग्नल कार्प्स में ऑफिसर हैं। आपको बता दें कि वह आर्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती हैं। उनके दादा भी सेना में थे और उनके पति मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री में आर्मी ऑफिसर हैं।
    1. कैप्टन दिव्या अजीथ कुमार

    कैप्टन दिव्या अजीथ कुमार भारतीय सेना में ऐसी पहली महिला कैडेट हैं जिन्हें  स्वार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया है। गौरतलब हो कि कैप्टन दिव्या ने 26 जनवरी 2015 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सेना की ऑल वूमेन कंटीजेंट परेड का नेतृत्व किया था। भरतनाट्यम में पारंगत दिव्या खेल के क्षेत्र में भी काफी आगे रहती हैं। जानना दिलचस्प होगा कि चेन्नई की रहने वाली और एक तमिल परिवार से ताल्लुक रखने वाली कैप्टन दिव्या कुमार आज भी अपनी ड्यूटी से समय निकालकर क्षेत्र के आस-पास के स्कूलों में जाती हैं और वहां लड़कियों को आर्मी में आने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। बताते हैं कि दिव्या के प्रोत्साहन के चलते बहुत सी महिलाओं ने आर्मी ज्वाइन भी किया है।
    1. निवेदिता चौधरी एवरेस्ट फतह करने वाली एयरफोर्स की पहली महिला अफसर

    क्या आप जानते हैं कि हिमालय के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली एयरफोर्स की पहली महिला अफसर कौन हैं? यह कीर्तिमान बनाने वाली साहसी महिला हैं राजस्थान की मूल निवासी तथा एयरफोर्स आफिसर निवेदिता चौधरी। बताते चलें कि साल 2013 में माउंट एवरेस्ट को फतह करने के इस पर्वतारोहण अभियान में उनकी टीम में एयरफोर्स अफसर स्क्वाड्रन लीडर निरुपमा पांडे और फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजिका शर्मा भी उनके साथ थीं। मगर वे पांच दिन बाद शिखर पर पहुंची थीं।

    13. शांति तिग्गा : सेना में शामिल होने वाली पहली महिला जवान

    पुस्र्षों के लिए सुरक्षित माने जाने वाली भारतीय सेना में पहली बार एक महिला जवान को शामिल किया गया है जो दो बच्चों की मां भी है। शारीरिक परीक्षण में अपने पुस्र्ष समकक्षों को पीछे छोड़ते हुए 35 वर्षीय सैपर शांति तिग्गा को 969 रेलवे इंजीनियर रेजीमेंट आफ टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया गया है। उन्होंने सभी शारीरिक परीक्षण में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। उसने 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में अपने पुस्र्ष समकक्षों की तुलना में पांच सेकंड कम वक्त लिया। उसने 50 मीटर की दूरी 12 सेकंड में तय की। बताते चलें कि तिग्गा ने 13 लाख रक्षा बलों में पहली महिला जवान बनने का अनोखा गौरव हासिल किया है।
    1. सशस्त्र सीमा बल की चीफ अर्चना रामसुंदरम

    अर्चना रामसुंदरम एसएसबी की पहली महिला चीफ हैं। देश में इस समय पांच अर्द्धसैनिक बल हैं-सशत्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस। इनमें से किसी भी बल में कभी कोई महिला प्रमुख नहीं रही। अर्चना रामसुंदरम पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें एसएसबी का चीफ बनने का गौरव मिला। बताते चलें कि अर्चना रामसुंदरम  तमिलनाडु कैडर की 1980 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं।
    1. पद्मा बंदोपाध्याय: पहली महिला एयर वाइस मार्शल

    डॉ पद्मा बंदोपाध्याय भारत की पहली महिला एयर वाइस मार्शल हैं। डॉ पद्मा भारतीय वायु सेना की एयर कमोडोर पद पर पदोन्नत होने वाली पहली महिला अधिकारी और भारत के एयरोस्पेस मेडिकल सोसायटी की पहली सदस्य भी हैं। वह उत्तरी ध्रुव में वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। पद्मा बंदोपध्याय की एक और उपलब्धि यह है कि वह भी रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। 1973 में उन्हें विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुआ और 1991 में उन्हें एएफएचए सम्मान मिला था।

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