- एच.एम.आई.एस. के सर्वेक्षण रिपोर्ट 2017-18 में हुआ खुलासा
लखनऊ 14, मार्च, 2018: सूबे के 75 जिलों में से 56 जिलों के शहरी इलाकों में खसरा रोग का एक भी मरीज नहीं मिला है। इसका खुलासा एच.एम.आई.एस. यानी हेल्थ मैनेजमेंट इनफाॅरमेशन सर्वे में हुआ।
सर्वे की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेशभर के अधिकांश इलाकों पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल, रूहेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के शहरी आबादी में खसरा रोग का एक भी मरीज नहीं मिला है। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विधानसभा क्षेत्र गोरखपुर भी है। हलांकि कुछ ऐसे जिले भी हैं जहां गांव की आबादी की तुलना में शहरी आबादी में अधिक मरीज मिले हैं।
पूर्वांचल के सिद्वार्थ नगर, संतकबीर नगर, गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, आजमगढ., मउनाथ भंजन, वाराणसी, जौनपुर, संतरविदास नगर और मिर्जापुर के शहरी क्षेत्र में खसरा का कोई मरीज नहीं मिला है। वहीं बुंदेलखंड इलाके जैसे ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट के शहरों में खसरा का एक भी रोगी नहीं मिला है। इसी तरह पश्चिमांचल में जैसे बरेली, पीलीभीत, बागपत, हापुड., शाहजहांपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, एटा, मैनपुरी, रामपुर, इटावा, बिजनौर, और फिरोजाबाद में खसरे मामले में सामने नहीं आ पाये हैं। इसी तहर बाराबंकी, बलरामपुर, गोण्डा, बहराईच, श्रावस्ती, फैजाबाद, सुलतानपुर, जालौन, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, कानपुर देहात, काशीराम नगर, कौशांबी, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, देवरिया, कन्नौज, हाथरस, जालौन, बदायूं, बुलंदशहर, ज्योतिबा फूले नगर, सीएसएम नगर और औरया, में भी खसरा रोग पलायन की ओर दिख रहा है।
वहीं आगरा, अलीगढ., गाजियाबाद, ज्योतिबाफूले नगर, कुशीनगर, महराजगंज, शामली और सोनभद्र ऐसे प्रमुख जिले हैं। जहां गांव की आबादी की तुलना में शहरी आबादी में अधिक मरीज मिले हैं।
हेल्थ मैनेजमेंट इनफाॅरमेशन सिस्टम के ताजा सर्वेक्षण की रिपोर्ट मानें तो प्रदेश में इस वर्ष कुल 4789 मरीज पाये गए। इसमें से 4758 मरीज सरकारी अस्पतालों में मिले जबकि 31 निजी अस्पतालों में पाये गए। प्रदेशभर के ग्रामीण इलाकों में मरीजों की संख्या 4181 है जबकि शहरी क्षेत्रों में 608 मरीज पाये गए हैं।
क्या कहते हैं चिकित्सक:
सी.एच.सी. इंदिरा नगर लखनऊ की बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ शुचि कुमार ने बताया कि खसरे से बचने के लिए दो खुराक टीका लगाया जाता है। दोनों ही टीके लगवाने अतिआवश्यक हैं। दो टीकों की विकल्प में खसरे का नया टीका एम.आर. यानी खसरा और रूबेला वैक्सीन आता है। हालांकि प्रदेश में अभी कुछ जिलों में ही एम.आर की निःशुल्क सुविधा नहीं है।
डाॅ. राम मनोहर चिकित्सालय के आयुष चिकित्सक एस.के.पाण्डेय ने बताया कि खसरा रोगी का शरीर बहुत तेजी से कमजोर होता है और उसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी शीघ्र घटने लगती है। भोजन में तेल, घी, पनीर, चटनी, अचार और मसाले आदि का उपयोग कतई नहीं करना चाहिए। भोजन में दलिया, सादी खिचड.ी आदि खाना चाहिए। उचित इलाज नहीं होने पर रोगी का पहले फेफड.ा फिर दिल प्रभावित होता है। इलाज में और देरी होने पर लीवर और किडनी भी प्रभावित होते हैं। रोग के प्रति लापरवाही बरतने पर रोगी की मौत हो सकती है।
बीमारी पहचानें:
खसरा एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है। संक्रमित मरीज के सांस के जरिए मीजल्स वायरस दूसरों तक पहुचने पर यह बीमारी फैलती है। इससे ग्रसित रोगी का शुरू में गला खराब होता फिर उसे बुखार आता है। यह बीमारी खास तौर 9 माह से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्वाधिक होती है। खसरे में पहले चार दिन तक काफी तेज बुखार आता है। इसका तापमान 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। रोगी की आंखों में लाली, सूजन और खुजली होती है। रोगी के गले में दर्द, खांसी, जुकाम, नाक से पानी बहता है और तेज बुखार आता है। साथ ही शरीर में थकान लगती है। पूरे शरीर पर दाने निकल आते हैं। दाने नुकीले होते हैं और उनका आकार फोड.े जैसा होता है। यानी दाने के ऊपरी हिस्से में मवाद भरी होती और नीचे की ओर लाली होती है।
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार खसरे से बचने के लिए दो खुराक टीका लगाया जाता है। पहली खुराक 9 से 12 महीने की उम्र के बीच दी जानी चाहिए। इसके बाद 16-24 महीने की उम्र के बीच दूसरी खुराक डीपीटी यानी डिप्थेरिया, पर्टूसिंस और टेटनस बूस्टर की खुराक के साथ दी जानी चाहिए।
एच.एम.आई.एस. सर्वेक्षण 2017-18
- मरीजों की कुल संख्या 4789
- सरकारी अस्पताल 4758
- निजी अस्पताल 31
- शहरी क्षेत्र 608
- ग्रामीण क्षेत्र 4181
- शून्य खसरा -मरीज जिले -फैजाबाद, संतकबीरनगर और महोबा
- 56 जनपदों के शहरी इलाकों में नहीं मिले खसरा के मरीज






