- पत्रकार सेवा करने वाला चुनिए पत्रकार नेता नहीं
- 24 साल मुसलसल पत्रकारिता की सेवा के बाद जागा है पत्रकारों की सेवा का जज़्बा
लखनऊ, 14 अप्रैल। 24 साल के नये नवेले संस्कारी पत्रकार ने मुझे फोन किया। बोला- भाई साहब आप बहुत अच्छा लिखते हो। मैं आपका पाठक भी हूं और फैन भी। आपने इतना अच्छा लिखना किससे सीखा! सोशल मीडिया और तमाम सोशल साइट्स पर मैं आपको पढ़ता रहता हूं।
क्या आपसे मिल सकता हूं!
मैंने बुला लिया। उसने फिर पूछा-आपने किससे लिखना सीखा!
मैंने जवाब दिया- सीखा नहीं है, सीख रहा हूं। जितनी तुम्हारी उम्र है (24 वर्ष) इतने वर्षों से मैं लिखना सीख रहा हूं। आठ मीडिया समूहों में काम का 24 साल का तजुर्बा मेरा गुरु है।
नवजीवन, स्वतंत्र भारत, अमर उजाला, आग, पायनियर, राहत टाइम्स, समर शिखर (मार्केट में खूब बिकने वाला सांध्य समाचार पत्र, जिसमें संपादक था) जैसे तमाम अखबारों की हजारों बाई लाइन खबरों की कटिंग की फाइल दिखायी। 17-18 वर्ष की राज्य मुख्यालय की रिपोर्टिंग की खबरें और तमाम दस्तावेज दिखाये।
ईटीवी और आकाशवाणी के सैकड़ों न्यूज बेस कार्यक्रमों का विवरण देखकर नवोदित पत्रकार ने फिर एक सवाल किया- आप पत्रकारों और अखबारों की समस्याओं और गंदी पत्रकार राजनीति पर बहुत लिखते हैं। क्या अब पत्रकार नेता के तौर पर अपने को स्थापित करना चाहते हैं। मैंने कहा हरगिज नहीं। पत्रकाकारिता और पत्रकारों की सेवा करना चाहता हूं। जो सेवा अपने कलम से कर भी रहा हूं।
नवोदित पत्रकार बोला- आप 24 वर्षों से निरंतर पत्रकारिता कर रहे हैं। इससे पहले भी कभी पत्रकारिता के साथ पत्रकारिता की सेवा नहीं की। मैंने कहा- पहले ईमानदारी से खबरें लिखने को पत्रकार सेवा मानता था। अब पत्रकारिता और पत्रकारों के हक की आवाज को उठा कर पत्रकारिता की सेवा कर रहा हूं।
जैसे डा. त्रेहन बीसियों साल की प्रेक्टिस के बाद अब अस्पताल संचालित कर रहे हैं।
बिना प्रेक्टिस के वो अस्पताल संचालित करते तो उनके अस्पताल पर कौन यकीन करता?
इस बहाने मैं अपनी पत्रकारिता के 24 साल के सफरनामे के अतीत में खो गया था और नवोदित पत्रकार अपने सारे सवालों के जवाब सुन कर खुश था।
(जिज्ञासा हो तो और भी दोस्त मेरी पत्रकारिता के म्यूजियम के दर्शन कर सकते है। 24 वर्षों के दौरान आधा दर्जन से ज्यादा नामचीन अखबारों में मेरी हजारों खबरों का संकलन आज भी महफूज है।)
नवेद शिकोह







