Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 732 जूता चांदी का चले और पड़े बेभाव। तुरंत बनेंगे काम सब, दे मूंछों पर ताव।। दे मूंछों पर ताव, इसी में लाल जडे हैं, आमिल काबिल सभी, हांफते चित्त पड़े हैं, काला करें सफेद, इसी का है बलबूता। बड़े काम की चीज, यही चांदी का जूता।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन