- 17 जून को आरक्षण समर्थकों द्वारा प्रातः 6 बजे निकलने वाले ‘आरक्षण बचाओ पैदल मार्च’ को मा. उच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस मा. श्री खेमकरन जी दिखायेंगे हरी झण्डी
- संघर्ष समिति के आहवान पर उप्र के अनेकों जिलों सहित देश के दूसरे राज्यों में भी आरक्षण समर्थक 17 जून को स्वाभिमान दिवस के रूप में जोर शोर से मनायेंगे
लखनऊ, 14 जून। लोकसभा से पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल पास कराने व मा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा विगत दिनों पारित आदेश को लागू कराने के लिये 17 जून, 2018 प्रातः 6 बजे डा. भीमराव अम्बेडकर स्मारक, गोमती नगर मेन गेट से निकल कर ताज होटल होते हुए सामाजिक परिवर्तन प्रतीक स्थल से पुनः अम्बेडकर स्मारक तक निकलने वाले ‘‘आरक्षण बचाओ पैदल मार्च‘‘ की तैयारी को अन्तिम रूप दिया गया। वहीं आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र ने यह ऐलान कर दिया है कि चूंकि 17 जून 1995 को पदोन्नति में आरक्षण का 77वां संविधान संशोधन लागू हुआ था, इसलिये सभी जिलों में स्वाभिमान दिवस मनाया जायेगा।
लखनऊ में होने वाले आरक्षण समर्थकों के विशाल पैदल मार्च को मा. उच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस मा. श्री खेमकरन जी सुबह 6 बजे हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। उप्र की भांति बिहार, राजस्थान, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, हरियाणा सहित अन्य राज्यों में 17 जून को स्वाभिमान दिवस मनाया जायेगा। यदि समय रहते केन्द्र व उप्र की सरकार ने दलित कार्मिकों के साथ न्याय न किया तो प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक और उनका परिवार पूरे जोर शोर से 2019 में वोट की ताकत का एहसास करायेंगे।
इस मौके पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, एसपी सिंह, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, लेखराम, राकेश पुष्कर, प्रेम चन्द्र, रामेन्द्र कुमार, फूलचन्द्र, रतीराम, प्यारे लाल ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि जिस प्रकार से पिछले लगभग साढ़े 4 साल से पदोन्नति में आरक्षण का बिल लम्बित रखकर केन्द्र की मोदी सरकार पूरे देश के लाखों दलित कार्मिकों को अपमानित कर रही है। उससे यह सिद्ध हो गया है कि भाजपा को दलित कार्मिकों से कोई वास्ता नहीं है। समय रहते यदि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा दलित कार्मिकों को न्याय न दिया गया तो आने वाले समय में सभी राज्यों के दलित कार्मिक दिल्ली में चक्का जाम करेंगे।
संघर्ष समिति के नेताओं ने पुनः उप्र की योगी सरकार से मांग उठायी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के तहत अविलम्ब उप्र की सरकार आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को बहाल करें और जब तक प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण की बहाली का आदेश जारी न हो जाये तब तक सभी विभागों में पदोन्नतियों पर रोक लगायी जाये। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति उप्र सरकार से यह भी मांग करती है कि 1977-78 के बीच प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के लिये पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था विद्यमान थी जिसे बाद में समाप्त किया गया। उसे उप्र की सरकार पुनः बहाल कर पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के लिये पदोन्नति में आरक्षण का रास्ता प्रशस्त करे।







