लखनऊ, 26 जून। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र संयोजक मण्डल द्वारा आज आरक्षण के जनक छत्रपति साहू जी महाराज की जयन्ती धूमधाम से मनायी गयी और इस अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर सैकड़ों आरक्षण समर्थकों ने उन्हें याद किया।
आरक्षण समर्थकों ने इस अवसर पर केन्द्र व उप्र की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि छत्रपति साहू जी महाराज ने सर्वप्रथम सन् 1902 में अपने राज्य में आरक्षण लागू करके आरक्षण की विधिवत् शुरूआत की थी और आज वह दिन आ गया है कि आरक्षण पर आये दिन कुठाराघात हो रहा है। नेता केवल कोरी बयानबाजी कर वाह वाही लूट रहे हैं। दलित व पिछड़ों के आरक्षण पर कठोर कानून बनाने के लिये कोई भी तैयार नहीं है जो सरकारों की आरक्षण विरोधी नीति को उजागर कर रहा है।
इस मौके पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के संयोजकों सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, एसपी सिंह, वीके आर्या, महेन्द्र सिंह, लेखराम, दिनेश कुमार, अजय चैधरी, जितेन्द्र कुमार, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, राम औतार, श्रीनिवास राव, प्रभु शंकर राव, घनश्याम, बृहदत्त वर्मा, छोटे लाल ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि
उप्र सरकार आरक्षण पर राजनीति कर रही है।
उप्र सरकार आरक्षण पर राजनीति कर रही है।
15 जून, 2018 को भारत सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के लिये सभी राज्यों के लिये सर्कुलर जारी किया। लेकिन उप्र में जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी चुप्पी साधे हैं और वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुख्य सचिव महोदय जो 30 जून को रिटायर हो रहे वह लगातार पदोन्नति हेतु डीपीसी कर रहे हैं। पहले पावर कार्पोरेशन में पिछड़े वर्ग का आरक्षण समाप्त कर निदेशकों की डीपीसी की गयी और अब 27 जून को पीपीएस की डीपीसी होने जा रही है। निश्चित तौर पर यह सब दलित कार्मिकों के हक को मारने के लिये हो रहा है, जो दलित विरोधी नीति को दर्शाता है। संघर्ष समिति यह मांग करती है कि जब तक उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) बहाल न कर दी जाये तब तक प्रदेश में कोई भी पदोन्नति संबंधी डीपीसी न की जाये।







