दयानन्द पांडेय
कांवड़ियों की गुंडई कोई नई बात नहीं है। लोग इन से त्राहिमाम कर गए हैं। लेकिन मेरा मानना है कि जहां भी कहीं कांवड़िये गुंडई करते हैं, वहां के डीएम और एसपी भी गुंडे हैं। या फिर वह कायर और अक्षम हैं । अपने पद पर उन्हें रहने का कोई अधिकार नहीं है । भीड़ कैसी भी हो, कैसी भी स्थिति हो पूरी ज़िम्मेदारी प्रशासन की होती है । प्रशासन जिस दिन चाह ले एक पैसे की कोई गुंडई नहीं हो सकती। कांवड़िये भला कौन सी बला हैं।
कांवड़ियों की गुंडई पर अभी दो ठो डीएम और एसपी सस्पेंड हो जाएं तो देखिए यही प्रशासन इन गुंडे कांवड़ियों को ऐसा राइट टाइम कर देगा कि कहीं कोई गुंडई करना यह सपने में भी भूल जाएंगे। बात बस प्रशासन के सख्ती की है।
आप कहेंगे मुख्यमंत्री। तो मुझे यह कहने दीजिए कि कोई भी मुख्य मंत्री अपने राज्य में अराजकता नहीं चाहता। कांवड़ियों की गुंडई हम मुलायम, मायावती, अखिलेश हर किसी के राज में देखते रहे हैं। और अब तो इस गुंडई की लपट दिल्ली तक पहुंच गई है।
कोई एक योगी राज में ही नहीं हो रही कांवड़ियों की यह गुंडई । हां, बस मुख्यमंत्री को इन गुंडे के लिए डीएम और एसपी को काबू करने की हिम्मत दिखानी पड़ेगी। वरना मान लीजिए कि मुख्यमंत्री भी इन कांवड़ियों की तरह गुंडा है। या फिर कायर और अक्षम है। इन गुंडों को धार्मिक संरक्षण मत दीजिए। किसी धर्म से इन का कोई लेना-देना नहीं है।
यह अपराधी लोग हैं और अगर कोई धर्म इन्हें संरक्षण देता है तो समझ लीजिए उस धर्म में ज़रुर कोई खोट आ गया है । उस धर्म को भी कंडम करने का समय आ गया है। हम क़ानून के राज में रहते हैं, किसी धर्म के राज में नहीं । सो उस धर्म को गोली मारिए । क्यों कि धर्म तो विनय, शील और सहिष्णुता सिखाता है। ख़ास कर हिंदू धर्म ।








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