26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के अचानक टूटने से भोटेकोशी नदी में भयंकर बाढ़ आई। बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबे की विशाल लहर ने घाटियों को तहस-नहस कर दिया। त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे बसे गांव, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं क्षणों में बह गईं।
31 अगस्त तक नेपाल में करीब 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अभी भी 4200 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें सैकड़ों विदेशी पर्यटक, हाइड्रोपावर मजदूर और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। दस हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। तिब्बत में भी दर्जनों मौतें और सैकड़ों लापता बताए गए हैं। कुछ शव भारत की नदियों तक पहुंच गए।
नुवाकोट जिले के बेत्रावती और विदुर क्षेत्र में तबाही सबसे दर्दनाक है। एक ही मकान से बीस से अधिक शव निकाले गए। चितवन में नदी किनारे सबसे अधिक लाशें मिलीं क्योंकि पानी उन्हें दूर तक बहा ले गया। कई शव पहचान से बाहर हो चुके हैं। डीएनए सैंपल लेकर अस्थायी दफन किया जा रहा है।सड़ते शव, दूषित पानी और टूटी सीवर व्यवस्था के कारण अब जलजनित बीमारियों और महामारी का खतरा बढ़ गया है। राहत शिविरों में भीड़ और गंदगी स्थिति को और जटिल बना रही है।
यह आपदा सिर्फ प्रकृति का प्रकोप नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन की चेतावनी है। हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और अस्थिर हो गए हैं। एक छोटे से टूटने ने सैकड़ों परिवारों को मिटा दिया। नुवाकोट के उस घर से निकले शव हमें याद दिलाते हैं कि कितनी आसानी से पूरी पीढ़ियां समाप्त हो सकती हैं।
लापता लोगों के परिवार अब अनिश्चितता में जी रहे हैं। पहचान की प्रक्रिया धीमी है, मोर्ग भर चुके हैं और स्वास्थ्य खतरा मंडरा रहा है। विकास के नाम पर नदी किनारे बने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे मजदूर इस बात की याद दिलाते हैं कि जोखिम भरे निर्माण की कीमत कितनी भारी होती है।
https://x.com/guneshgodara/status/2094047214880653391/video/1
अब जरूरत है ठोस कदमों की। सीमा पार से समय पर चेतावनी प्रणाली मजबूत करनी होगी। नदी किनारे अनियोजित बसावट रोकनी होगी। राहत के साथ-साथ लंबे समय का पुनर्निर्माण और समुदायों को तैयार करना होगा।
नेपाल की सेना, पुलिस और स्थानीय लोग दिन-रात लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आ रहा है। लेकिन असली सबक यह है कि प्रकृति के सामने हम कितने
असहाय हैं। इस त्रासदी को सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा में समझना होगा जिन्होंने एक साथ सब कुछ खो दिया।
तैयारी ही बचाव है। देर मत करें।






