डॉ दिलीप अग्निहोत्री
आजादी के सात दशक बाद भी देश के करोड़ो लोग बैंकिंग सुविधा से दूर थे। एक बड़ी आबादी ने बैक को भीतर से देखा तक नहीं था। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही इस ओर धयन दिया। कुछ ही समय में तीस करोड़ से ज्यादा लोग खातेदार बन गए। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैक इसका अगला चरण है। मोदी सरकार ने गरीबों को मुख्यधारा में लाने के लिए सैकड़ों योजनाएं लागू की है। एक सितंबर को इस सूची में एक अन्य योजना जुड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का उद्घाटन किया।देश के अनेक प्रमुख शहरों में एक साथ यह कार्य किया गया। बैंक और पेमेंट का मसला था, तो बिना कहे विजय माल्या और नीरव मोदी का भी प्रसंग आ गया। इसे राहुल गांधी ने दिलचस्प तरीके में नोटबन्दी से भी जोड़ा था। इसलिए इस अवसर पर उंसकी भी चर्चा हो गई। राहुल गांधी ने नोटबन्दी का कारण बिल्कुल पहेली बुझाने के अंदाज में दिया था। उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों का धन जमा कराया। ये धन लेकर नीरव मोदी विदेश भाग गया। नरेंद्र मोदी ने इसका जबाब इस अवसर पर दिया।
विजय माल्या, नीरव मोदी ,जैसे सैकड़ों लोगों ने कांग्रेस की नीतियों का ही लाभ उठाया था। आजादी के बाद से लेकर साल दो हजार आठ तक देश के बैंकों ने अठारह लाख करोड़ रुपये की राशि ही लोन के तौर पर दी थी। लेकिन दो हजार आठ के बाद छह वर्षों में ये राशि बढ़कर बावन लाख करोड़ रुपये हो गई। इसका यह अर्थ हुआ कि जितना लोन बैंकों ने आजादी के बाद दिया था, उसका दोगुना लोन पिछली सरकार के छह साल में बांट दिया। हमारे देश में फोन बैंकिंग का प्रसार उस समय उतना नहीं हुआ था, लेकिन नामदारों ने फोन पर बैंकिंग और फोन पर कर्ज दिलवाने शुरू कर दिए थे। जिस भी बड़े उद्योगपति को लोन चाहिए होता था, वो नामदारों से बैंक को फोन करवा देता था। बैंक वाले फिर उस व्यक्ति या उसकी कंपनी को तत्काल करोड़ों रुपये का कर्ज दे देते थे।
कांग्रेस शासन में फोन बैंकिंग ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया। जबकि नोटबन्दी से अनेक लाभ हुए है। चौबीस प्रतिशत आयकरदाता बढ़े। कार्ड से लेन देन पैसठ प्रतिशत बढ़ा। बैंकों का जमा तीन लाख करोड़ रुपये बढा। सोलह हजार करोड़ रु बैंक में वापस ही नही आये। चार लाख से ज्यादा बैंक लेनदेन संदिग्ध है। इनकी जांच हो रही है। तीन लाख से ऊपर के सभी जमा धन की जांच चल रही है। डिजिटल भुगतान में छप्पन प्रतिशत की वृद्धि। आईडीएस में पैसठ हजार करोड़ रुपये आये। तिहत्तर करोड़ से ज़्यादा बैंक खाते आधार कार्ड से लिंक हुए।
अठारह लाख से ज़्यादा खाते जांच के दायरे में हैं। साढ़े पांच लाख ऐसे लोग चिन्हित किये गए, जिनके जमा उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक है। तीन लाख बोर्ड ऑफ डिरेक्टर अयोग्य घोषित किये गए। इतनी ही फर्जी कम्पनी पकड़ी गई। साढ़े बयालीस हजार करोड़ की अघोषित सम्पत्ति का पता चला। नोटबन्दी के बाद से अब तक दो लाख करोड़ का काला धन जप्त किया जा चुका है और लगभग पांच लाख करोड़ की जांच हो रही है। देश के सभी डेढ़ लाख डाकघर इस वर्ष के अंत तक। प्रणाली से जुड़ जाएंगे।
सत्रह करोड़ खातों के साथ यह अपनी बैंकिंग शुरू करेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़े पैमाने पर फायदा होगा। इसके सेविंग अकाउंट में ग्राहक एक लाख रुपये तक की सेविंग कर सकता है। सेविंग अकाउंट खोलने पर ज्यादा ब्याज मिलेगा। खाते में न्यूनतम धनराशि से कम रखने पर कोई कटौती नहीं होगी। इस भुगतान बैंक में भारत सरकार की सौ प्रतिशत हिस्सेदारी है। निश्चित ही यह योजना गांव और गरीबों के लिए उपयोगी साबित होगी। नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार को गरीबों के लिए समर्पित बताया था। सरकार उसी दिशा में कदम बढ़ा रही है।







