यूएसएस अब्राहम लिंकन का रिकॉर्ड तोड़ तैनाती, गुप्त विमान बदलाव और तेहरान की मौत की धमकियां : क्या ट्रंप खुद अपने बनाए जाल में फंस गए?
दुनिया की निगाहें एक बार फिर अमेरिका-ईरान टकराव पर टिकी हुई हैं। यह कोई साधारण तनाव नहीं, बल्कि एक ऐसा युद्ध है जो महीनों से चल रहा है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेर चुका है। महाभारत के चक्रव्यूह की तरह- जहां प्रवेश आसान लेकिन बाहर निकलना लगभग असंभव होता है – ट्रंप अब उसी भूलभुलैया में फंसे नजर आ रहे हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव और अपनी ही आक्रामक नीतियों के चलते शुरू हुआ यह संघर्ष अब अमेरिकी नौसेना के जवानों की मानसिक सेहत से लेकर राष्ट्रपति की सुरक्षा तक सब कुछ प्रभावित कर रहा है। अगस्त 2026 के मध्य तक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि एक अमेरिकी विमानवाहक पोत रिकॉर्ड तोड़ तैनाती के बाद राहत की मांग कर रहा है, जबकि ईरान में “किल ट्रंप” के नारे गूंज रहे हैं।
युद्ध की शुरुआत और अब्राहम लिंकन की लंबी समुद्री यात्रा
नवंबर 2025 में जब यूएसएस अब्राहम लिंकन सैन डिएगो से रवाना हुआ था, तो योजना दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामान्य गश्त की थी। लेकिन जनवरी 2026 में इजरायल-ईरान टकराव के बाद इसे अचानक मध्य पूर्व की ओर मोड़ दिया गया। फरवरी के अंत में अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद युद्ध औपचारिक रूप से छिड़ गया। अब्राहम लिंकन पर करीब 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात थे। पोत ने 200 दिनों से अधिक समय तक बिना किसी बंदरगाह पर रुके समुद्र में बिताया – यह आधुनिक अमेरिकी नौसेना के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
जून-जुलाई 2026 तक पोत ने 207 लगातार दिन समुद्र में बिता लिए थे, जो कोविड काल के यूएसएस आइजनहावर के रिकॉर्ड को तोड़ चुका था। कुल तैनाती 250-265 दिनों से अधिक हो गई। जवानों को गंदे कपड़े पहनने, पानी की कमी, टॉयलेट खराब होने, राशन सीमित होने और मेल सिस्टम बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
मानसिक तनाव इतना बढ़ा कि कम से कम एक नौसैनिक समुद्र में कूद गया। परिवारों और कुछ सीनेटरों ने पेंटागन से शिकायत की। डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने दावा किया कि स्थिति को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, लेकिन दबाव इतना बढ़ा कि अंततः यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को राहत के लिए भेजा गया। ट्रंप ने खुद कहा कि तैनाती “लगभग काफी लंबी नहीं” है और पोत को जल्द बदला जा रहा है।
यह सिर्फ एक पोत की कहानी नहीं। युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई। बहरीन जैसे अमेरिकी ठिकानों तक सामान पहुंचाना मुश्किल हो गया। जवानों के परिवारों में आक्रोश फैला। कई अमेरिकी सांसदों और मरीन परिवारों ने खुलासा किया कि युद्धपोत पर जीवन नरक जैसा हो गया था। कई हफ्तों तक जहाज पर गर्म पानी नहीं मिला, टॉयलेट्स खराब रहे और लॉन्ड्री सुविधा बंद रहने से सैनिक गंदे कपड़े पहनने को मजबूर हुए। भोजन की मात्रा सीमित हो गई। यह स्थिति अमेरिकी सेना के मनोबल पर भारी पड़ रही है।
गुप्त विमान बदलाव: सुरक्षा का डर या राजनीतिक संदेश?
जुलाई 2026 में तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में एक नाटकीय घटना हुई। वॉशिंगटन पोस्ट और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान से संभावित हत्या की धमकी के चलते ट्रंप ने गुपचुप तरीके से विमान बदला। वे टेलीविजन कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए, फिर एक ऊंचे एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक में छिपकर एक छोटे सैन्य विमान (सी-32ए) तक पहुंचाए गए। कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए विमान और पुराने एयर फोर्स वन को डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किया गया। ट्रंप ने बाद में पुष्टि की कि सीक्रेट सर्विस और सैन्य सलाहकारों के कहने पर उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने कहा, “मुझे कई धमकियां मिलती हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते।”
यह घटना दर्शाती है कि ईरान का खतरा अब सिर्फ युद्धपोतों तक सीमित नहीं रहा। ट्रंप के सुरक्षा सलाहकारों में भी चिंता बढ़ी है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जुलाई 2026 में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के दौरान आक्रोश चरम पर था। यह पहला मौका नहीं जब ट्रंप ने विमान बदला हो। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने एक से अधिक बार ऐसा किया। व्हाइट हाउस कर्मचारियों को भी कई बार पूरी जानकारी नहीं दी गई।
ईरान में खामेनेई की मौत के बाद का आक्रोश
फरवरी 2026 के हमलों में खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। उनके बेटे मोजतबा को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। जुलाई में अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। भीड़ ने “किल ट्रंप” के नारे लगाए। पोस्टर्स पर ट्रंप, जेडी वेंस, पीट हेगसेथ और नेतन्याहू की तस्वीरों पर बंदूक का निशाना बना हुआ था। अंग्रेजी में बड़े अक्षरों में “KILL TRUMP” और “There will be blood” लिखा गया। महिलाओं ने काले कपड़ों में प्लेकार्ड उठाए। एक होर्डिंग पर ट्रंप का सिर गोली का निशाना बना था और लिखा था – “अमेरिका ने हमारे पिता को मारा है, हम तुम्हें छोड़ेंगे नहीं!”
भीड़ ने कसम खाई कि वे अपने नेता के खून का बदला लेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने “अपराधी हत्यारों” की एक हिट-लिस्ट तैयार की है। नया सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने लिखित बयान जारी कर कहा कि ईरान राष्ट्रीय संकल्प के साथ बदला लेगा। ये नारे और पोस्टर्स सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक संदेश हैं कि युद्ध अब व्यक्तिगत हो चुका है।
चक्रव्यूह की तुलना: इतिहास से सबक
महाभारत में चक्रव्यूह एक जटिल सैन्य रचना थी। अभिमन्यु उसमें घुस तो गए लेकिन बाहर नहीं निकल सके। आज ट्रंप की स्थिति कुछ ऐसी ही लगती है। इजरायल के साथ गठजोड़, ईरान पर दबाव और नौसेना की लंबी तैनाती ने एक ऐसा जाल बना दिया है जिसमें अमेरिकी जवान थक चुके हैं, संसाधन सीमित हो रहे हैं और सुरक्षा खतरे बढ़ रहे हैं। प्रशांत क्षेत्र से विमानवाहक पोत हटाकर मध्य पूर्व भेजना चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को संकेत दे रहा है कि अमेरिका की प्राथमिकताएं बदल रही हैं।
युद्ध अब छठे महीने में है। अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को और कठोर बनाने की बात कर रहा है। ट्रेजरी सेक्रेटरी ने ऐसे उपायों का जिक्र किया जिन्हें दुनिया ने पहले नहीं देखा। लेकिन नौसेना की थकान और जवानों की मानसिक स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं लगती। परिवारों की शिकायतें, सीनेटरों के पत्र और मीडिया रिपोर्ट्स दबाव बना रहे हैं। ट्रंप प्रशासन दावा करता है कि नाकाबंदी अनिश्चित काल तक जारी रखी जा सकती है, लेकिन वास्तविकता अलग है।
जवानों की कहानी और मानवीय पहलू
अब्राहम लिंकन पर तैनात जवानों ने हजारों सॉर्टीज भरीं और लाखों पाउंड गोला-बारूद गिराया। लेकिन इसके बदले उन्हें थकान, अलगाव और अनिश्चितता मिली। एक नौसैनिक की पत्नी ने चेतावनियों को नजरअंदाज किए जाने की बात कही। कई परिवारों ने कहा कि मेल सिस्टम बाधित होने से केयर पैकेज महीनों तक नहीं पहुंचे। पानी प्रदूषण, प्लंबिंग समस्याएं और डेक सुरक्षा चिंताएं आम हो गईं। मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों की कमी ने स्थिति और बिगाड़ी।
यह सिर्फ एक पोत की समस्या नहीं। लंबे युद्ध में अमेरिकी सेना की तैयारी और रोटेशन क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। जॉर्ज वाशिंगटन के आने से राहत मिलेगी, लेकिन युद्ध जारी रहा तो नई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
भू-राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
ईरान अब बराबर की चुनौती पेश कर रहा है। पहले अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता निर्विवाद मानी जाती थी, लेकिन लंबे संघर्ष ने दोनों पक्षों को थका दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी से तेल कीमतें प्रभावित हुईं। चीन और अन्य देश स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र से ध्यान हटने से क्षेत्रीय संतुलन बदल रहा है।
ट्रंप की सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ी हैं। गुप्त विमान बदलाव सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक संकेत है कि खतरा वास्तविक माना जा रहा है। ईरान की तरफ से आक्रामक प्रचार और नारे युद्ध को और व्यक्तिगत बना रहे हैं।
इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता आसान नहीं। बातचीत, आर्थिक दबाव या सैन्य समाधान – हर विकल्प के अपने जोखिम हैं। अमेरिकी जवानों की सेहत, राष्ट्रपति की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता तीनों दांव पर हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसे जटिल संघर्ष अक्सर अप्रत्याशित मोड़ लेते हैं। ट्रंप चाहें या न चाहें, वे अब इस भूलभुलैया के केंद्र में हैं – और बाहर निकलने का रास्ता अभी साफ नहीं दिख रहा।
- प्रस्तुति: सुशील कुमार







