- नित्य होगा पार्थिव षिवार्चन, योग-ध्यान व हनुमान चालीसा पाठ संग्रह
- श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ: खाटू ष्याम मंदिर भक्तिधाम ट्रस्ट
लखनऊ, 25 नवम्बर। ‘भक्ति तो ठीक है पर भक्ति से पहले मनुष्यता होना जरूरी है।भक्ति और श्रद्धा न हो तो कथा का महात्म्यप्राप्त नहीं हो सकता।’ ये उद्गार वृन्दावन धाम के आचार्य पीयूषजी महाराज ने मौनी मां की स्मृति में भक्तिधाम ट्रस्ट नैनीताल द्वारा बीरबलसाहनी मार्ग स्थित खाटूष्याम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पहले दिन भागवत का महात्म्य बताते हुए व्यक्त किए।
यहां भागवत कथा पहली दिसम्बर तक नित्य दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक चलेगी। आचार्य पीयूष ने आगे कहा कि विलास में डूबे हुए देवताओं को शुकदेवजी ने आग्रह करने के बाद भी कथा नहीं सुनाई। क्योंकि, ज्ञान जब जीवन के व्यवहार में न उतरे तब तक व्यर्थ है।
आत्मदेव नामक विद्वान का प्रसंग छेड़ते हुए पीयूष जी कहा कि आत्म देव समस्त ज्ञान का ज्ञाता होने पर भी पुत्रमोह नहीं छोड़ पाया। परिणाम यह हुअ कि धंुधकारी जैसे पुत्र को पाकर बहुत दुखीहुआ। इससे यह समझा जा सकता है कि जिसकी हम इच्छा करते हैं वह ही हमारे दुख का कारण बन जताी है। आत्मदेव केदूसरे पुत्र गोकरण के ज्ञान देने पर ही उनका मोह भंग हुआ।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म समाज की आंख है, इससे व्यक्ति मेंजीवन दर्षन पनपता, विकसित होता है।
कथा से पूर्व अतिथियों का स्वागत मुख्य ट्रस्टी व संयोजक गजेन्द्र सिंह बिष्ट ने किया। सह संयोजक जीवन चंद्र उत्प्रेती ने शुद्धिकरण कराते हुए कथारसिकों को ध्यान-योग कराया। इसके साथ ही यहां सुबह 18 सौ पार्थिव षिवार्चन का पूजन प्रारम्भ हुआ। यह पार्थिव षिवार्चन नित्य सुबह 7.30 बजे से दोपहर एक बजे तक पहली दिसम्बर तक चलेगा। इसके अतिरिक्त पूर्वाह्नयहां श्रीमद्भागवत को बग्घी में स्थापित कर महिलाओं की मंगल कलश यात्रा भी संकट मोचन मंदिर हनुमान सेतु तक निकालीगई, जो वापस कथास्थल तक आकर समाप्त हुई।
श्री बिष्ट ने बताया कि मौनी मां की प्रेरणा से यहां संसार की सभी भाषाओं मेंएक करोड़ हनुमान चालीसा पाठ संग्रह का कार्य भी ट्रस्ट की ओर से जारी है। यह पाठ गिनीज बुक आफ रिकार्ड में भी दर्जकराया जायेगा। इस अवसर पर यहां डा.हेमेन्द्र शर्मा, दान सिंह रावल, रामबली गुप्ता, चन्द्रा रावल, कंचन पाण्डेय, संतोष बक्शी, एस.एस.रावल आदि सहयोगियों के तौर पर उपस्थित रहे।







