मैं सबको कुछ अच्छा कुछ बुरा लिखता हूँ,
पर जो जैसा है वैसा लिखता हूँ।
इस तरह मैं कलम से न्याय लिखता हूँ,
पत्रकार हूँ बस सच लिखता हूँ।।
इस तरह से मैं सबकी नज़रों में चढ़ता हूँ,
किसी को सही तो किसी को गलत दिखता हूँ।
चरण वंदना से बन जाता किसी का खास मैं भी,
पर क्या करूँ जो सच में पत्रकार हूँ।।
सरस्वती और शक्ति का मिला हमें वरदान है,
पर माँ लक्ष्मी न हम पर मेहरबान हैं।
जेब खाली पर अकड़ बड़ी मतवाली है,
पत्रकार जो हूँ सच साहस से लिखता हूँ।।

– राहुल कुमार गुप्त







