बेटा : हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर सेवा करते रहना
नई दिल्ली: इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है – मोहब्बत। सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा ने इसी मोहब्बत को साबित कर दिया। वे कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर पहुँचीं और वहाँ एक नौजवान मोहम्मद जुनैद को गले लगाया और कहा, “बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने आई है।”
सुनीता जी रोज़ जुनैद को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखती थीं। इस इंसानी सेवा ने उनके दिल को छू लिया। मुलाकात होते ही उनकी आँखें भर आईं और उन्होंने जुनैद को आशीर्वाद दिया – “हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर सेवा करते रहना।”
यह दृश्य नफरत की दीवारों को पार कर जाने वाली मोहब्बत की मिसाल बन गया। भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत है – यही इस पल में झलक उठा।
लोगों ने सराहा :
- आसिफ: “मां आपको सलाम। मां के पैरों तले जन्नत है। सुनीता अरोड़ा जी पूरे देश के नौजवानों के लिए माँ समान हैं।”
- एस के एस: “ये है असली भारत। आजकल यह पहचान विलुप्त होती जा रही है, इसे ज़िंदा रखने के लिए मेहनत करनी होगी।”
- प्रकाश भटनागर: “भारत हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है। कुछ लोग माहौल खराब करते हैं, लेकिन अच्छे वक्त की वापसी हो रही है।”
- प्रिन्स: “इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। मदद और सहारे की बात हो तो धर्म को साइड रखकर पहले इंसानियत दिखानी चाहिए।”
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बता दें कि यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जब दिल से दिल जुड़ते हैं, तो धर्म, जाति और दूरी की कोई दीवार नहीं टिकती।






