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    Home»इंडिया

    प्रतिबद्धता उच्च शिक्षा में सुधार की

    By June 14, 2019 इंडिया No Comments6 Mins Read
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           डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति सदैव सजग रहते है। संविधान ने राज्यपाल से कतिपय विषयों पर स्वविवेक से निर्णय की अपेक्षा की है। इनमें संबंधित प्रदेश के विश्वविद्यालय भी शामिल है। राम नाईक ने जब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला था, तब विश्वविद्यालयों के स्तर पर कई बुनियादी समस्याएं थी। सत्र नियमित नहीं थे, नियमित दीक्षांत समारोह के प्रति पर्याप्त सजगता का भाव नहीं था। गुणवत्ता की भी समस्याएं थी। राम नाईक ने इन सबपर गंभीरता से ध्यान दिया। कुलपतियों, शिक्षाविदों से सीधा संवाद कायम किया। कुलपतियों के सम्मेलन नियमित आयोजित करने पर बल दिया। नियमित सत्र और दीक्षांत समारोहों का सीधा संबन्ध अध्ययन के माहौल के साथ ही खेल, सांस्क्रतिक समारोहों से होता है। सत्र नियमित होते है तो विद्यर्थियो का अमूल्य समय बर्वाद नहीं होता। समय पर वह परीक्षा फल, डिग्री लेकर आगे की तैयारी कर सकते है।
    सत्र नियमित होने से शिक्षकों पर भी समय से कोर्स पूरा करने का दबाब रहता है। राम नाईक ने पहली प्राथमिकता इसी को दी थी। दीक्षांत समारोह का प्रचलन किसी न किसी रूप में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से रहा है। इसके माध्यम से संबंधित गुरुकुल अपनी विशेषताओं को सामने लाते थे। विभिन्न विद्याओं में होनहार विद्यार्थी सम्मानित होते थे । अन्य विद्यर्थियो को इससे प्रेरणा मिलती थी। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव जागृत होता था। सत्र नियमित करने और दीक्षांत समारोह के नियमित आयोजन में सफलता मिली। नकल विहीन परीक्षा के प्रति भी उन्होने कटिबद्धता दिखाई । इसके भी सार्थक परिणाम दिखाई दिए।
    वर्तमान सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री और उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी सुधार की दिशा में प्रयत्नशील रहते है। इस प्रकार पहले की अपेक्षा अनुकूल स्थिति है। इसका सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहा है।
     इस क्रम में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति राज्य विश्वविद्यालय राम नाईक की अध्यक्षता में राजभवन में कुलपति सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें समस्त राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति  उपस्थित थे। कुलपति सम्मेलन में एजेण्डा के तौर पर परीक्षा परिणामों के घोषणा की अद्यतन स्थिति, चालू शैक्षिक कलैण्डर  का निर्धारण, नकल, फर्जी अंकतालिका एवं उपाधियों पर नियंत्रण, नवीन नैक मूल्याकंन प्रक्रिया का अनुपालन, विश्वविद्यालयों के नये नियमों के परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक संवर्ग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया, शोध पीठ की स्थापना एवं शोध, विश्वविद्यालयों के बढ़ते वित्तीय भार के सापेक्ष वित्तीय संसाधन विषय पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
    विश्वविद्यालयों में वित्तीय संसाधन के संबंध में राज्यपाल ने तीन सदस्यीय कुलपतियों की समिति गठित की है, जिसमें  कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय,  कुलपति, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुलपति, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर सदस्य होंगे। जो अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत करेंगे। राज्यपाल उक्त रिपोर्ट को अपने सुझावों सहित शासन को संदर्भित करेंगे। कुलपति, एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ एवं कुलपति, चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की दूसरी दो सदस्यीय समिति बनाई गई है जो पीएचडी पूर्ण करने की तिथि के संबंध में विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्थापित अलग अलग व्यवस्थाओं के दृष्टिगत एकरूपता लाने के लिये सुझाव देगी।
    राज्यपाल ने कुलपति सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुये कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जो बाधाएं हैं उसे योग्य पद्धति से दूर करने पर विचार करें। रिक्तियाँ भरने के लिये योग्य ढंग से नियुक्ति होनी चाहिये। केन्द्र सरकार ने जो शिक्षा नीति घोषित की है उस पर भी विचार किया जाना चाहिए। स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों को लेकर यह देखने की आवश्यकता है कि वे समाज के लिये कितने उपयोगी हैं। जिन पाठ्यक्रमों की मांग हो उस पर परिवर्तन करने के लिये नियमित रूप से विचार करने की आवश्यकता है। प्रतिस्पर्धा के युग में शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर हर विश्वविद्यालय अपनी स्थिति का मूल्यांकन करे। देश के प्रथम सौ विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश के भी विश्वविद्यालय सम्मिलित हों, इस भूमिका में कुलपतिगण काम करें। उन्होंने कहा कि शैक्षिक गुणवत्ता का विषय सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिये एक चुनौती है जिसे स्वीकार करते हुये बेहतर प्रदर्शन करने की आवश्यकता है।
    राम नाईक ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शोध की गुणवत्ता को भी बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। शोध और शोध पीठों का लाभ समाज को मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा में नये आयाम में कदम रखा है। छात्राओं का प्रतिशत चार वर्ष पहले में  चालीस प्रतिशत था वह अब बढ़कर  छप्पन प्रतिशत पहुंचा है। शैक्षिक सत्र गत वर्ष  सम्पन्न हुये दीक्षान्त समारोह में छांछठ प्रतिशत पदक छात्राओं के पक्ष में गये हैं। महिला सशक्तीकरण का यह एक शुभ संदेश है। नकलविहीन परीक्षा कराने की दृष्टि से उठाये गये कदम सराहनीय थे। निःसन्देह इससे छात्रों की संख्या में कमी अवश्य आयी है, पर यह परिवर्तन लोगों के समझ में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की उपलब्धियाँ समाज के सामने आनी चाहिए।
    राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा पटरी पर आ गयी है। उच्च शिक्षा में मौलिक परिवर्तन हुये है। चार वर्ष में सभी सत्र नियमित हुये हैं। दीक्षान्त समारोह समय पर तथा भारतीय वेशभूषा में सम्पन्न हुये हैं। सभी उपलब्धियाँ सामूहिक प्रयास का कारण हैं जो कुलपतियों के सहयोग से संभव हो सका है। परन्तुु अभी भी विश्वविद्यालयों में सुधार की काफी गुंजाइश है। पाठ्यक्रम कितना रोजगारपरक है इस पर भी विचार करें। नकल, फर्जी अंक तालिका एवं उपाधि पर ठोस कदम उठाये जाने की आवश्यकता है। फर्जी अंक तालिका एवं उपाधि जैसे विषय किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इससे जहाँ एक ओर विश्वविद्यालय की बदनामी होती है वहीं प्रदेश की छवि भी धूमिल होती है।
    कुलपति सम्मेलन में ई लर्निंग, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार शैक्षिक दिवस, प्रवेश, परीक्षाफल, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाएं, ई-लाईब्रेरी, अभिलेखों की डिजिटाइजेशन आदि पर भी चर्चा हुई जिसमें कुलपतियों ने भी अपने अपने विचार रखे।
    कुलाधिपति  राम नाईक ने सत्र दो हजार उन्नीस बाइस में सम्पन्न होने वाले दीक्षान्त समारोह की प्रस्तावित तिथियाँ घोषित कर दी हैं। दीक्षान्त समारोह कैलेण्डर के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह तिरासी दिवसों में सम्पन्न होकर छात्र छात्राओं को उपाधियाँ वितरित हो जायेंगी। दीक्षान्त समारोह पारम्परिक भारतीय वेशभूषा में सम्पन्न होंगे।
     गत वर्ष कुल एक सौ सात दिवसों में सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो सके थे। राम नाईक ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण करने के पश्चात से ही कुलाधिपति के रूप में प्रदेश की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास किया है। पूर्व में विश्वविद्यालय में शैक्षिक कलैण्डर घोषित न होना, समय से प्रवेश न होना, ससमय परीक्षाएं आयोजित एवं परिणाम घोषित न होना एवं समय से दीक्षान्त समारोह सम्पन्न न होने से छात्र-छात्राओं को समय से उपाधियाँ भी प्राप्त नहीं होती थी जिससे छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने में बाधा आती थी।
    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कैलण्डर को सुव्यवस्थित करने एवं शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए प्रतिवर्ष दो कुलपति सम्मेलन आयोजित कर उत्तर प्रदेश शासन के उच्चाधिकारियों, कुलपतियों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों से चर्चा की तथा मार्गदर्शन किया। इसका ही परिणाम है कि अब विश्वविद्यालयों में समय से प्रवेश हो रहे है तथा परीक्षाएं आयोजित होकर परिणाम भी घोषित हो रहे हैं। सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह भी निश्चित समय सीमा में करने के लिए प्रस्तावित कैलेण्डर घोषित किया गया है। राम नाईक के इन प्रयासों से उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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